परविंदर झोटा हत्या मामले में राजनीतिक तनाव और नशे की समस्या
मानसा में तनाव का माहौल
एंटी ड्रग टास्क फोर्स के कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के अंतिम संस्कार में देरी के कारण मानसा और आस-पास के क्षेत्रों में तनाव बना हुआ है। विधायकों के घरों के बाहर धरने और गृह मंत्री शाह के झोटा के परिवार से मिलने के विरोध ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
हत्या की साजिश का खुलासा
पुलिस ने बताया कि 13 अक्टूबर को परविंदर सिंह झोटा की हत्या के आरोपी अश्वनी कुमार ने दो साल से झोटा को मारने की योजना बनाई थी। वह हमेशा हथियार रखता था। मानसा के पुलिस अधीक्षक वैभव चौधरी ने कहा कि अश्वनी अपनी पत्नी से इस बारे में चर्चा करता था और झोटा द्वारा उसे परेशान करने की बात करता था। 2023 में झोटा ने उसे जूतों की माला पहनाकर पूरे शहर में घुमाया था, जिससे अश्वनी अपमानित महसूस कर रहा था।
पुलिस की कार्रवाई और नशे की समस्या
अश्वनी की पत्नी नीलम रानी को हत्या की साजिश की जानकारी थी, लेकिन उसने पुलिस को सूचित नहीं किया। इस कारण उसे भी मामले में नामजद किया गया। पुलिस अधीक्षक ने हथियारों के लाइसेंस की जांच का आश्वासन दिया है। परविंदर सिंह झोटा इंसाफ कमेटी ने नशीले पदार्थों की बिक्री से जुड़े मामलों में कार्रवाई की मांग की है।
राजनीतिकरण का प्रभाव
अश्वनी कुमार और परविंदर सिंह झोटा दोनों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, लेकिन झोटा हत्याकांड को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए नशे की समस्या का समाधान चुनावी मुद्दा बन गया है। पिछले दो दशकों से पंजाब नशे की समस्या से जूझ रहा है।
समस्या का मूल कारण
मान सरकार ने 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' अभियान चलाया है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आतंकवाद और नशे का सहारा लिया है। समय की मांग है कि नशे के मुद्दे का राजनीतिकरण करने के बजाय इसके मूल कारणों को समझा जाए, ताकि पंजाब की युवा पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।
मुख्य संपादक का संदेश
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक।
