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पल्स पोलियो अभियान 2026: 28 से 30 जून तक बच्चों को मिलेगी पोलियो रोधी दवा

डीसी अभिषेक मीणा ने 28 से 30 जून तक होने वाले पल्स पोलियो अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। इस अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष के लगभग 94,285 बच्चों को पोलियो रोधी दवा दी जाएगी। इसके अलावा, डायरिया रोकने के अभियान और एचपीवी वैक्सीनेशन पर भी चर्चा की गई। जानें इस महत्वपूर्ण अभियान के बारे में और क्या-क्या किया जाएगा।
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पल्स पोलियो अभियान 2026: 28 से 30 जून तक बच्चों को मिलेगी पोलियो रोधी दवा

पल्स पोलियो अभियान की तैयारी

डीसी अभिषेक मीणा ने 28 से 30 जून तक आयोजित होने वाले पल्स पोलियो अभियान की सफलतापूर्वक योजना बनाने के लिए बुधवार को लघु सचिवालय सभागार में एक बैठक की। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत 28 जून को बूथ गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जबकि 29 और 30 जून को घर-घर जाकर पोलियो ड्रॉप्स पिलाई जाएंगी।


बच्चों को पोलियो रोधी दवा

इस अभियान में जिले के 682 बूथों पर 0 से 5 वर्ष के लगभग 94,285 बच्चों को पोलियो रोधी दवा दी जाएगी। इसके अलावा, संवेदनशील क्षेत्रों जैसे झुग्गी-झोपड़ी, निर्माणाधीन भवनों आदि में बच्चों को पोलियो की खुराक देने के लिए 38 मोबाइल टीमों का गठन किया गया है। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर भी टीमें तैनात की गई हैं।


स्वास्थ्य विभाग की भूमिका

डीसी ने स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए ताकि अभियान को सफल बनाया जा सके। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी पोलियो रोधी दवा पिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।


डायरिया रोकने का अभियान

इसके साथ ही, डीसी ने 31 जुलाई तक चलने वाले डायरिया रोकने के अभियान और एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान की समीक्षा की। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. भंवर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार, पल्स पोलियो अभियान के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पहले दिन बूथ पर पोलियो की दवा दी जाएगी, जबकि दूसरे और तीसरे दिन टीमें घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को पोलियो की खुराक देंगी।


ओआरएस पैकेट का वितरण

इस अभियान के दौरान, आशा कार्यकर्ता और एएनएम घर-घर जाकर 0 से 5 वर्ष के बच्चों को ओआरएस पैकेट वितरित करेंगे और अभिभावकों को ओआरएस और जिंक के उपयोग के बारे में जानकारी देंगे।


एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान

डीसी ने एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान की भी समीक्षा की और इसे तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया ताकि 14 से 15 वर्ष की किशोरियों को एचपीवी वैक्सीनेशन के बारे में जानकारी मिल सके। यह वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारणों से सुरक्षा प्रदान करती है।