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पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, ईरान ने फिर से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बावजूद हिंसा जारी है। इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष के बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने का निर्णय लिया है। इस स्थिति का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
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पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, ईरान ने फिर से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव

तेहरान - अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए शांति समझौते के बावजूद, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय और भी बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और लेबनान में सैन्य गतिविधियों को रोकने जैसी महत्वपूर्ण शर्तें शामिल थीं, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में हिंसा जारी है।


इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष

19 जून की रात, अमेरिकी पहल पर इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा की गई थी। हालांकि, यह संघर्ष विराम अधिक समय तक नहीं टिक सका, और घोषणा के केवल आठ घंटे बाद ही दोनों पक्षों के बीच फिर से सैन्य टकराव शुरू हो गया।


इजराइली हमले में casualties

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह क्षेत्र में ड्रोन और तोपखाने से हमला किया, जिसमें कम से कम 16 लोगों की जान चली गई। इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि देश अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और गाजा तथा लेबनान में इजराइली सैन्य अभियान आवश्यकतानुसार जारी रहेंगे।


ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने का निर्णय

ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज जलडमरूमध्य
वहीं, ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, देश की संयुक्त सैन्य कमान ने सरकारी टेलीविजन पर इसकी जानकारी दी। खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर का कहना है कि अमेरिका शांति समझौते की पहली शर्त को लागू करने में विफल रहा है और इजराइल लगातार दक्षिणी लेबनान में युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है।


वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव

ईरान ने इसे समझौते का उल्लंघन मानते हुए होर्मुज मार्ग से जहाजों की आवाजाही रोकने का निर्णय लिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। खाड़ी देशों से होने वाले ऊर्जा निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहता है, तो वैश्विक तेल बाजार, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ गई है।