पश्चिम बंग दिवस पर अग्निमित्रा पॉल का बयान: श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान
पश्चिम बंग दिवस का महत्व
भवानीपुर: पश्चिम बंगाल सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने 'पश्चिम बंग दिवस' के अवसर पर कहा कि यह दिन बंगाल के लोगों, विशेषकर बंगाली हिंदुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और भावनात्मक है। उन्होंने इस दिन का श्रेय भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दिया।
अग्निमित्रा पॉल ने मीडिया से बातचीत में कहा, "यह हमारे लिए एक भावुक क्षण है। बंगाल के पूर्वज हमेशा एक स्वतंत्र बंगाल का सपना देखते थे और 'पश्चिम बंग दिवस' मनाना चाहते थे। यह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की दूरदर्शिता और संघर्ष का परिणाम है, जिसने बंगाल के लोगों के कल्याण के लिए मार्ग प्रशस्त किया।"
उन्होंने बताया कि तारकेश्वर में पहली बैठक हुई थी, जहां यह निर्णय लिया गया था कि स्वतंत्रता के बाद बंगाल का विभाजन होना चाहिए। उस क्षेत्र को भारत में रखा जाना चाहिए जहां हिंदू जनसंख्या अधिक है, जबकि बाकी हिस्सा बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) में जाना चाहिए।
अग्निमित्रा पॉल ने कहा, "अगर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी नहीं होते, तो आज हम बांग्लादेश में होते। आज हम स्वतंत्र हैं और अपनी संस्कृति, विचारधारा और पहचान को बचा पाए हैं, इसका श्रेय डॉ. मुखर्जी को जाता है।"
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने कई बार पूर्व की राज्य सरकार से 20 जून को 'पश्चिम बंग दिवस' के रूप में मनाने की मांग की थी, क्योंकि इसी दिन पश्चिम बंगाल का गठन हुआ था। लेकिन उस समय की सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। उस सरकार ने चाहा कि बंगाली नववर्ष को 'पश्चिम बंग दिवस' के रूप में मनाया जाए और इतिहास को भुला दिया जाए।
राज्य सरकार की मंत्री ने कहा कि अंततः बंगाल की जनता की आवाज सुनी गई और आज यह ऐतिहासिक दिन मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस अवसर पर कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं, और मुख्यमंत्री भी उनके साथ रहेंगी। उन्होंने कहा कि यह दिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद करने और बंगाल के इतिहास को सम्मान देने का अवसर है, जिसे लेकर राज्य के लोग गर्वित और भावुक हैं।
