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पश्चिम बंगाल उपचुनाव में TMC को लगा बड़ा झटका, रबीउल आलम चौधरी ने वापस लिया नामांकन

पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी की पार्टी TMC को एक और बड़ा झटका लगा है। रेजीनगर सीट से उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। इससे पहले, नंदीग्राम से TMC की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने भी ऐसा ही किया था। इस राजनीतिक घटनाक्रम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक प्रभाव।
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TMC को नया झटका

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। नंदीग्राम के बाद, अब रेजीनगर सीट से TMC के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने उपचुनाव से अपना नामांकन वापस लेने का निर्णय लिया है।


संचिता प्रधान का नामांकन वापस लेना

इससे पहले, नंदीग्राम उपचुनाव से TMC की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने भी अपना नामांकन वापस लिया था। उपचुनाव में मतदान के लिए लगभग एक महीने का समय शेष है। नामांकन वापस लेने से कुछ घंटे पहले, उन्होंने राज्य सचिवालय नबन्ना में मुख्यमंत्री और नंदीग्राम के मौजूदा विधायक सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को पहले शिष्टाचार भेंट माना गया था, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं।


चुनाव चिन्ह का विवाद

बताया गया है कि डे ने गुपचुप तरीके से सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। यह मुलाकात उस समय हुई थी जब चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के खेमे को 'फुटबॉल खिलाड़ी' का चुनाव चिह्न और रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी खेमे को 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया था। नामांकन वापस लेने के बाद, ममता बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए उसे 'जुमला पार्टी' कहा और यह भी घोषणा की कि उनका खेमा कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा।


कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी

कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार

हालांकि, राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल गए। ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा के लगभग एक घंटे बाद ही उन्हें एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के अनुसार, यह मामला तीन हत्या के मामलों से जुड़ा था, जिनमें से एक मामला 2007 का था।