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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों का नया राजनीतिक कदम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ आया है, जब तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का निर्णय लिया। इस कदम ने राज्य में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है, और बागी सांसदों का कहना है कि वे NDA के साथ मिलकर काम करेंगे। ममता बनर्जी की पार्टी ने इसे साजिश बताया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों का नया राजनीतिक कदम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़


पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद राज्य की राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। बागी सांसदों का कहना है कि वे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले NDA के साथ सहयोग करेंगे। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली TMC ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे पार्टी के खिलाफ एक साजिश करार दिया है.


NCPI की स्थापना और राजनीतिक स्थिति

NCPI एक नई राजनीतिक पार्टी है, जिसकी स्थापना 2023 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में उत्तिया कुंडू और उनकी पत्नी शेउली कुंडू ने की थी। पार्टी के अनुसार, उत्तिया कुंडू इसके अध्यक्ष हैं और शेउली कुंडू कोषाध्यक्ष। इस पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भी अपने उम्मीदवार खड़े किए थे, लेकिन उन्हें अपेक्षित वोट नहीं मिले थे। चुनाव के दौरान उनका नारा था कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दलबदलुओं को नकारें। अब यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है.


बागी सांसदों की मांगें और राजनीतिक भविष्य

बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था और अपने समूह को अलग पहचान देने की मांग की है। उनका दावा है कि उनके साथ TMC के दो-तिहाई सांसद हैं, इसलिए उन्हें दल-बदल कानून के तहत सुरक्षा मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, ममता बनर्जी और पार्टी के अन्य नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर बागी सांसदों को मान्यता न देने की अपील की है.


अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष और अदालतों के निर्णय पर है। यदि बागी सांसदों को मान्यता मिलती है, तो वे भविष्य में TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी दावा कर सकते हैं। ममता बनर्जी अपनी पार्टी और संगठन पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश करेंगी। ऐसे में आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति और भी रोचक होने की संभावना है.