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पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं, हूती विद्रोहियों ने दी चेतावनी

पाकिस्तान की स्थिति यमन के हूती विद्रोहियों की चेतावनी के बाद और भी गंभीर हो गई है। सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर 'इस्लामिक नाटो' बनाने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब वैश्विक स्तर पर शर्मिंदा हो रहा है। हूती विद्रोहियों ने स्पष्ट किया है कि यदि पाकिस्तान और तुर्की ने यमन के खिलाफ कोई कदम उठाया, तो परिणाम गंभीर होंगे। जानें इस स्थिति का क्या असर हो सकता है और पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति कैसे प्रभावित हो रही है।
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पाकिस्तान की बढ़ती चुनौतियाँ

इस्लामाबाद: सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर 'मक्का समझौते' के तहत एक कथित 'इस्लामिक नाटो' बनाने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब मुश्किलों में घिरता जा रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए जा रहे मिसाइल हमलों पर पाकिस्तान की चुप्पी ने उसे वैश्विक स्तर पर शर्मिंदा कर दिया है। इस बीच, हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तान और तुर्की को खुली युद्ध की चेतावनी दी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल एचआर मैकमास्टर ने भी मक्का पैक्ट के पीछे पाकिस्तान की मंशा पर सवाल उठाए हैं।


हूती विद्रोहियों की चेतावनी

‘अगर आगे आए तो तुम पर भी हमला होगा’
हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में पाकिस्तानी और तुर्की सैनिकों की संभावित तैनाती पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हूती नेता अल-बुखैती ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि इस्लामाबाद और अंकारा ने यमन के खिलाफ कोई कदम उठाया, तो वे सीधे निशाने पर होंगे। उन्होंने कहा कि यमन केवल रक्षात्मक रणनीति पर है, लेकिन यदि विदेशी ताकतें हस्तक्षेप करती हैं, तो परिणाम गंभीर होंगे। हूती नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि यमन अपनी संप्रभुता में किसी भी बाहरी सैन्य हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।


सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों का हमला

रियाद और तेल डिपो पर हूतियों का बड़ा हमला
तनाव के बीच, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया। रियाद के एयरपोर्ट के पास जोरदार धमाके सुनाई दिए और आसमान में धुएं का गुबार देखा गया। हालांकि, सऊदी नीत सैन्य गठबंधन ने दावा किया कि मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया गया और कोई हताहत नहीं हुआ। इसके अलावा, लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह यनबू में प्रमुख तेल पाइपलाइन और अरामको के प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई, जिसे विफल करने का दावा किया गया है।


पाकिस्तान का शांति दूत बनने का प्रयास विफल

फुस्स हुआ पाकिस्तान का शांतिदूत बनने का प्लान
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच 7 अगस्त को हुए ऐतिहासिक समझौते में यह प्रावधान था कि किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। तुर्की ने इसे नाटो की तर्ज पर इस्लामिक रक्षा कवच कहा था। पाकिस्तान पहले ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर कूटनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वहां असफलता के बाद मक्का समझौते के जरिए खुद को इस्लामिक जगत का नेता दिखाने की कोशिश अब उलटी पड़ती दिख रही है। हूती विद्रोहियों के सीधे अल्टीमेटम ने शहबाज सरकार को गंभीर कूटनीतिक और सैन्य संकट में डाल दिया है।