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पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग: अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता

पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग पर मानवाधिकार संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। एक प्रमुख संगठन ने आरोप लगाया है कि इन कानूनों का इस्तेमाल व्यक्तिगत दुश्मनी और संपत्ति हड़पने के लिए किया जा रहा है। कराची में हाल ही में हुई एक घटना ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है, जहां एक ईसाई परिवार को झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की गई। संगठन ने चेतावनी दी है कि स्थिति और भी खतरनाक हो गई है, और ईशनिंदा के मामलों में वृद्धि हो रही है।
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पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों का गंभीर दुरुपयोग

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाले एक प्रमुख संगठन ने देश के ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि इन कानूनों का उपयोग व्यक्तिगत दुश्मनी, संपत्ति हड़पने और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।


वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने 9 जुलाई को कराची में एक और चिंताजनक घटना की जानकारी दी। आरोप है कि कुरान का एक कथित अपवित्र पन्ना एक दुकान पर डाक के माध्यम से भेजा गया, जिसमें एक ईसाई व्यक्ति अजीम जावेद और उनकी मां की तस्वीरें भी शामिल थीं। इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया, जिससे गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया और कई ईसाई परिवार अपने घरों में फंस गए।


मानवाधिकार संगठन ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, "यह केवल स्वतःस्फूर्त जनाक्रोश नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित साजिश प्रतीत होती है। आखिर कोई व्यक्ति कुरान का जला हुआ पन्ना अपनी तस्वीर और पहचान पत्र के साथ क्यों भेजेगा?"


वीओपीएम के अनुसार, यह घटना अजीम जावेद को झूठे आरोप में फंसाने की एक सोची-समझी कोशिश लगती है, जिसके पीछे व्यक्तिगत या वित्तीय विवाद हो सकता है।


संगठन ने कहा, "पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसी आरोप को हिंसा भड़काने के लिए सबूत की आवश्यकता नहीं होती। केवल भीड़ और माहौल ही काफी होते हैं। कराची की यह घटना 2023 के जरानवाला कांड से मिलती-जुलती है, जहां फर्जी ईशनिंदा आरोपों के चलते चर्चों और ईसाई घरों को जलाया गया था।"


वीओपीएम ने आगे कहा, "सरकार ने तब कार्रवाई की जब हालात बेकाबू हो चुके थे। यह सुशासन नहीं, बल्कि केवल संकट प्रबंधन है।"


पिछले सप्ताह, वीओपीएम ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों से जुड़ी स्थिति और भी खतरनाक हो गई है। संगठन के अनुसार, 2023 से 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि ईशनिंदा के मामलों में वृद्धि हो रही है, साथ ही भीड़ द्वारा हिंसा में भी इजाफा हो रहा है।


संगठन ने कहा, "आंकड़े इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। 2024 में लगभग 213 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर लगभग 250 हो गई। 2026 के शुरुआती आंकड़े भी इसी बढ़ते रुझान की ओर इशारा करते हैं।"


वीओपीएम ने चिंता जताते हुए कहा कि पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून लंबे समय से विवादों में रहे हैं, लेकिन अब इनका दुरुपयोग पहले से अधिक संगठित और व्यापक हो गया है।


संगठन ने कहा, "जो पहले केवल दुरुपयोग था, वह अब अधिक संगठित और व्यापक रूप ले चुका है। जब तक मजबूत कानूनी सुरक्षा और साक्ष्यों के लिए सख्त मानक लागू नहीं किए जाते, तब तक यह दुष्चक्र जारी रहेगा।"