Newzfatafatlogo

पासपोर्ट: नागरिकता का प्रमाण नहीं, केवल यात्रा दस्तावेज

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। इस स्पष्टीकरण के साथ, मंत्रालय ने पासपोर्ट के उद्देश्य और इसके उपयोग के बारे में जानकारी साझा की है। पिछले दशक में पासपोर्ट केंद्रों की संख्या में छह गुना वृद्धि हुई है, जिससे नागरिकों को यात्रा में सुविधा मिल रही है। जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर और क्या कहा गया है।
 | 

विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण


पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण मानने की भ्रांति पर विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण


भारतीय पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं।


अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना और विदेश में पहचान स्थापित करना है।


अंतरराष्ट्रीय यात्रा का उद्देश्य

अधिकारियों ने बताया कि पासपोर्ट का प्राथमिक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सक्षम बनाना है। इससे पहले आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे अन्य दस्तावेजों को नागरिकता के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करने पर सवाल उठाए जा चुके हैं।


पिछले दशक में पासपोर्ट नेटवर्क का विस्तार

14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार पासपोर्ट सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पिछले एक दशक में पासपोर्ट नेटवर्क में छह गुना वृद्धि हुई है।


देशभर में पासपोर्ट केंद्रों की संख्या

वर्तमान में देशभर में 545 पासपोर्ट केंद्र कार्यरत हैं, जबकि 10 वर्ष पहले इनकी संख्या केवल 77 थी। इस प्रकार, पासपोर्ट केंद्रों की संख्या में लगभग छह गुना वृद्धि हुई है। पिछले साल 10 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले गए थे और इस साल भी 10 और केंद्र खोले जाएंगे।


अधिकारी ने बताया कि पुलिस सत्यापन को छोड़कर पासपोर्ट जारी करने में औसतन छह कार्य दिवस लगते हैं। पासपोर्ट सेवा केंद्रों में आवेदकों द्वारा बिताया जाने वाला समय 45 मिनट से भी कम है।