पी चिदंबरम ने CBI और ED को अधिक शक्तियां देने का किया विरोध
पी चिदंबरम की गिरफ्तारी और वर्तमान स्थिति
मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को 16 अक्टूबर 2019 को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया। अब, चिदंबरम ED और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को अधिक शक्तियां देने के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। शुक्रवार को एक पुस्तक विमोचन समारोह में उन्होंने सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया, यह कहते हुए कि राज्य स्तर पर काम करने वाले अधिकारी अच्छे होते हैं, लेकिन केंद्र में आने पर उनकी कार्यशैली में बदलाव क्यों आता है। उन्होंने यह भी कहा कि पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन सकता है।
पुलिसिंग द रिपब्लिक पर चर्चा
खुफिया ब्यूरो (IB) के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद द्वारा लिखी गई किताब 'पुलिसिंग द रिपब्लिक' के विमोचन के दौरान चिदंबरम ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस कार्यक्रम में पुलिस सुधारों और वर्दीधारी कर्मियों द्वारा की जाने वाली कथित ज्यादतियों पर बात की गई। चिदंबरम ने CBI और ED जैसी एजेंसियों को अधिक शक्तियां देने के विचार को अस्वीकार किया, जबकि आंतरिक सुधारों की आवश्यकता पर सहमति जताई।
चिदंबरम के विचार
पुलिस की ज्यादतियों से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में चिदंबरम ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में थाना प्रभारी (SHO) से लेकर पुलिस महानिदेशक (DGP) तक एक पूरी हायरार्की होती है। उन्होंने कहा, 'CBI में बेहतरीन अधिकारी काम करते हैं, जो ज्यादातर राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर आते हैं। वे राज्य में अच्छे अधिकारी होते हैं, लेकिन केंद्र में आकर खराब क्यों हो जाते हैं? इसका कारण निगरानी और नियंत्रण की कमी है।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राज्य स्तर पर राजनीतिक हस्तक्षेप हो सकता है।
CBI और ED पर चिदंबरम की चिंता
चिदंबरम ने कहा, 'CBI और ED ने कई बार अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। वे खुद ही अपने स्तर को गिरा रहे हैं। IAS और IPS अधिकारी नेताओं के सामने खड़े नहीं हो पाते हैं। अधिकतम ट्रांसफर हो सकता है, लेकिन वे आपका सिर नहीं कलम कर देंगे। मेरी राय में CBI और ED पर नजर रखी जानी चाहिए, जैसे अमेरिका में FBI और अन्य संस्थाओं पर विधायिका की नजर होती है। इससे क्या होगा, मैं इसे आपकी कल्पना पर छोड़ता हूं।'
