पीएम मोदी का इंडोनेशिया दौरा: सम्मान, समझौते और सांस्कृतिक विरासत
प्रधानमंत्री मोदी का दौरा और सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्तमान में इंडोनेशिया के दौरे पर हैं, जो उनके इस यात्रा का दूसरा दिन है। इस दौरान, इंडोनेशिया ने उन्हें अपने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है, जिसकी घोषणा राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने की। इस अवसर पर, पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, सरकार और वहां की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया।
भारत-इंडोनेशिया संबंधों की नई ऊंचाइयां
पीएम मोदी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। दोनों देश विकास, सुरक्षा, तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि आज से दोनों देशों के संबंधों का एक नया अध्याय शुरू होगा।
UPI का विस्तार और तकनीकी सहयोग
पीएम मोदी ने कहा कि तकनीक के इस युग में सप्लाई चेन को मजबूत करना आवश्यक है। भारत और इंडोनेशिया ने क्रिटिकल मिनरल्स और स्टील क्षेत्र की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण समझौता किया है। उन्होंने बताया कि भारत का UPI जल्द ही इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम से जुड़ जाएगा, जिससे व्यापार और यात्रा को सरल बनाया जा सकेगा।
प्रांबानन मंदिर की यात्रा
पीएम मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया में रहेंगे और इस दौरान वे प्रम्बानन मंदिर का दौरा करेंगे। यह मंदिर 9वीं शताब्दी में बना है और भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है। इंडोनेशिया की संस्कृति पर हिंदू-बौद्ध सभ्यता का गहरा प्रभाव है, और यहां रामलीला का आयोजन भी होता है।
भारत-इंडोनेशिया के बीच समझौतों की सूची
पीएम मोदी के दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। भारत इंडोनेशिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) विकसित करने में मदद करेगा। इसके अलावा, भारतीय 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल के प्रदर्शन के बाद, इंडोनेशिया ने इसे खरीदने का निर्णय लिया है। भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की यूनिट भी उपलब्ध कराएगा।
स्ट्रेटेजिक निवेश और विकास
क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए, भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्माण में निवेश करेगा। इसके साथ ही, दोनों देश सबांग बंदरगाह के विकास पर भी सहयोग करेंगे, जो मलक्का जलडमरूमध्य पर स्थित है और भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से करीब 100 मील की दूरी पर है। यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
