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पीएम मोदी की मदद से 15 साल पुराना जमीन विवाद सुलझा

गुजरात के वडनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहपाठी असगर अली वोरा ने 15 साल से लटके अपने जमीन विवाद को सुलझाने के लिए पीएम से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद, बीजेपी के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन से अपना कब्जा छोड़ने का निर्णय लिया। यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी तेजी से आगे बढ़ा, जिससे वोरा को उनकी बेशकीमती जमीन का मालिकाना हक वापस मिल गया। जानिए इस दिलचस्प कहानी के बारे में और कैसे पीएम मोदी ने मदद की।
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वडनगर के सहपाठी की कहानी

मुंबई: गुजरात के वडनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पढ़ाई करने वाले 81 वर्षीय असगर अली वोरा की पीएम से मुलाकात ने उनके 15 साल पुराने जमीन विवाद को सुलझा दिया है। मीरा रोड के निवासी वोरा को भायंदर में स्थित उनकी कीमती जमीन का मालिकाना हक वापस मिल गया है। इस मामले में बीजेपी के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता की कंस्ट्रक्शन कंपनी 'सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स' ने विवादित प्लॉट से अपना कब्जा छोड़ने का निर्णय लिया है।


पीएम से मुलाकात का महत्व

वडनगर में साथ पढ़े थे, 8 सितंबर को पीएम से मिले थे वोरा
वोरा, जो वडनगर के बी.एन. हाई स्कूल में नरेंद्र मोदी के सहपाठी रहे हैं, ने 8 सितंबर को दिल्ली में पीएम से अपनी समस्या साझा की। उन्होंने बताया कि 1989 में उन्होंने भायंदर (ईस्ट) के नवघर क्षेत्र में लगभग 2,810 स्क्वायर मीटर जमीन खरीदी थी। उनका आरोप है कि 2011 में 'स्वयं बिल्डर्स' और भाजपा नेता नरेंद्र मेहता की कंपनी ने उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया। वो पिछले डेढ़ दशक से न्याय की तलाश में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। पीएम मोदी ने उनकी बात ध्यान से सुनी और जल्द न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।


प्रशासनिक कार्रवाई

पीएम के दखल के बाद मंत्रालय में बुलाई गई हाई-लेवल बैठक
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में असगर अली वोरा, भाजपा नेता नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कमिश्नर और टाउन प्लानर शामिल हुए। अधिकारियों ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच की।


विधायक का सरेंडर

विधायक ने सरेंडर की जमीन, वापस ली पुलिस शिकायत
बैठक के दौरान नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट को एक पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने विवादित जमीन से अपना कब्जा छोड़ने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि वे प्रशासन द्वारा जारी निर्माण अनुमति को भी वापस कर रहे हैं। मेहता ने दावा किया कि उन्होंने यह जमीन 2019 में खरीदी थी। इसके साथ ही, उन्होंने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर बताया कि दोनों पक्षों में सहमति बन गई है, इसलिए वे वोरा के खिलाफ अपनी पुरानी पुलिस शिकायत भी वापस ले रहे हैं। 15 साल बाद अपनी जमीन वापस मिलने पर असगर अली वोरा ने राहत की सांस ली है।