पीएम मोदी ने BRICS शिखर सम्मेलन में 20 वर्षों का महत्वाकांक्षी एजेंडा पेश किया
नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन
नई दिल्ली: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री मोदी ने संगठन के अगले दो दशकों के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर साल अध्यक्षता बदलने के बावजूद BRICS की गतिविधियों की गति को बनाए रखना आवश्यक है। इस दिशा में, उन्होंने 'BRICS निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र' की स्थापना का सुझाव दिया, जिससे पिछले, वर्तमान और भविष्य के अध्यक्ष देशों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो सके।
ट्रोइका व्यवस्था का महत्व
BRICS में अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है और इसका कोई स्थायी सचिवालय नहीं है। पीएम मोदी ने कहा कि इस स्थिति में ट्रोइका व्यवस्था के माध्यम से पुराने, वर्तमान और अगले अध्यक्ष देशों को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। इससे दीर्घकालिक योजनाओं, व्यापार पहलों और निर्णयों की गति को बनाए रखा जा सकेगा, भले ही अध्यक्षता बदल जाए।
डिजिटल रिकॉर्ड की आवश्यकता
फैसलों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री ने एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का सुझाव दिया, जिसमें हर निर्णय से जुड़े नोडल अधिकारी, समयसीमा और कार्यान्वयन की स्थिति को दर्ज किया जा सकेगा। इससे यह जानना आसान होगा कि किस निर्णय पर कितना कार्य हुआ है और कौन सा लक्ष्य अभी भी अधूरा है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार
UNSC सुधार पर भी पीएम का जोर
मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को और टाला नहीं जा सकता। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणाम तय करने की मांग की। इसके साथ ही, वित्तीय संस्थानों में मतदान अधिकार और नेतृत्व की भूमिका को वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप करने की बात भी की।
ग्लोबल साउथ की भूमिका
ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने की मांग
पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सामना करने में अग्रणी है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में इसकी भूमिका सीमित है। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को 'विशेषाधिकार के पिरामिड' से 'साझेदारी के मंच' में बदलने की आवश्यकता बताई, ताकि हर देश की आवाज सुनी जा सके और उसकी उचित भागीदारी सुनिश्चित हो।
BRICS का नया रोडमैप
अगले 20 वर्षों के लिए नया रोडमैप
प्रधानमंत्री ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने को तीन मुख्य आधार बताया। उन्होंने कहा कि BRICS को केवल अपने विस्तार और आंतरिक मजबूती पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर व्यापक सुधारों की दिशा में भी काम करना होगा। इसके लिए अगले शिखर सम्मेलन तक एक विस्तृत रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया गया।
