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पीएम मोदी ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते का किया स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया है, जिससे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की उम्मीद जताई गई है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से वैश्विक आर्थिक समस्याओं में कमी आएगी और लोगों की जानें भी बचेंगी। मोदी ने आशा व्यक्त की कि इससे हार्मुज जलडमरूमध्य में व्यापार को फिर से सुगम बनाया जा सकेगा। यह समझौता सभी प्रकार की दुश्मनी को समाप्त करेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को पुनर्जीवित करेगा।
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पीएम मोदी ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते का किया स्वागत

प्रधानमंत्री मोदी का बयान


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए भारत की अपील को दोहराया। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि इस समझौते से वैश्विक आर्थिक समस्याओं में कमी आएगी और लोगों की जानें भी बचेंगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इससे हार्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और व्यापार को फिर से सुगम बनाया जा सकेगा।


पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में कहा, "मैं अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने के लिए बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर गंभीर आर्थिक उथल-पुथल हुई है और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है। भारत को उम्मीद है कि इस सहमति के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित होगी और आवाजाही तथा व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। हमें उम्मीद है कि अन्य मुद्दों पर बातचीत से एक स्थायी और अंतिम समझौता हो सकेगा।"




अमेरिका-ईरान विवाद का इतिहास

अमेरिका-ईरान विवाद और शांति समझौता:


यह विवाद 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन हुआ। पिछले तीन महीनों से यह विवाद जारी था और अब यह समाप्त होने के कगार पर है। वाशिंगटन और तेहरान ने एक शांति प्रस्ताव पर सहमति जताई है, जिसके तहत 19 जून को जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है।


यह समझौता सभी प्रकार की दुश्मनी को समाप्त करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसके बंद होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर प्रभाव पड़ा था और कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई थी।