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पीओके में 80,000 लोगों का विरोध: पाकिस्तान का झूठा नैरेटिव हुआ बेनकाब

पाकिस्तान सरकार ने पिछले 78 वर्षों से पीओके को आजाद कश्मीर बताने का प्रयास किया है, लेकिन हाल ही में रावलकोट में हुए विरोध प्रदर्शन में 80,000 लोगों ने इस झूठ को बेनकाब कर दिया। पीओके के लोग अब स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि यह क्षेत्र कभी आजाद नहीं था। जानें इस महत्वपूर्ण घटना के बारे में और क्या कहा गया है।
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पीओके में बढ़ते विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली। पाकिस्तान सरकार पिछले 78 वर्षों से पीओके (PoK) को आजाद कश्मीर बताने का प्रयास कर रही थी। लेकिन अब पीओके की जनता ने सड़कों पर उतरकर इस झूठ को उजागर कर दिया है। हाल ही में रावलकोट में हुए बड़े विरोध प्रदर्शन में 80,000 लोगों ने यह स्पष्ट किया कि पीओके कभी आजाद नहीं था, बल्कि पाकिस्तान ने इसे बलात् कब्जा किया है।


पीओके के लोगों का स्पष्ट संदेश

सोशल मीडिया पर पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। रिटायर्ड एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि पाकिस्तान पिछले 78 वर्षों से जम्मू-कश्मीर को 'आजाद कश्मीर' कहता आया है, लेकिन अब पीओके के लोगों ने इस दावे को चुनौती दी है।


जेएएसी का लॉन्ग मार्च

जेएएसी के नेता सरदार अमान खान ने कहा, 'कश्मीर कोई विवादित क्षेत्र नहीं है। यह कब्जे वाला क्षेत्र है और यह कभी आजाद नहीं था।' अनिल चोपड़ा ने कहा कि भारत हमेशा यही बात कहता रहा है, जबकि पाकिस्तान इसे प्रोपेगेंडा मानता रहा है। अब पीओके के लोग खुद इस बात को स्वीकार कर रहे हैं।

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAC) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद के लिए 'लॉन्ग मार्च' का ऐलान किया है। पाकिस्तान सरकार ने इस एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध लगा दिया है और रावलकोट तथा मुजफ्फराबाद में सुरक्षा बलों की तैनाती की है। ऐसे में लॉन्ग मार्च के दौरान हिंसा की आशंका जताई जा रही है। एक्शन कमेटी पीओके विधानसभा में सीटों के आरक्षण, महंगाई और कश्मीरियों पर पाकिस्तानी बलों के दमन के खिलाफ आवाज उठा रही है।