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पीटी उषा: भारतीय एथलेटिक्स की उड़न परी की प्रेरणादायक कहानी

पीटी उषा, जिन्हें 'भारत की उड़न परी' कहा जाता है, ने ट्रैक और फील्ड खेलों में अपनी अद्वितीय प्रतिभा से न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई। उनका सफर 9 साल की उम्र में स्कूल चैंपियन को हराने से शुरू हुआ और उन्होंने एशियाई खेलों में 11 पदक जीते। जानें उनके संघर्ष, उपलब्धियों और वर्तमान में भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष बनने की कहानी।
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पीटी उषा का अद्वितीय सफर

नई दिल्ली: पीटी उषा ने ट्रैक और फील्ड खेलों में अपनी प्रतिभा के बल पर वह ऊंचाई हासिल की है, जिसका सपना हर एथलीट देखता है। महिलाओं के बीच इस खेल को लोकप्रिय बनाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनका सफर 9 साल की उम्र में स्कूल चैंपियन को हराने से शुरू हुआ और कई बड़ी उपलब्धियों की ओर बढ़ा।


बचपन और प्रारंभिक जीवन

पीटी उषा का जन्म 27 जून, 1964 को केरल के कोझिकोड जिले के पय्योली गांव में हुआ। उनका बचपन गरीबी में बीता, और एक समय ऐसा भी था जब उनके पास जूते खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। स्कूली दिनों से ही दौड़ने का शौक रखने वाली उषा ने 9 साल की उम्र में अपनी पहली प्रतियोगिता में अपने से तीन साल बड़े चैंपियन को हराकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।


प्रतिभा की पहचान और प्रशिक्षण

उषा ने अपनी पढ़ाई के दौरान जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। उनकी दौड़ने की क्षमता ने उन्हें चर्चा का विषय बना दिया। केरल सरकार ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें 250 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की, जो उनके लिए उस समय बहुत महत्वपूर्ण थी। इसके बाद, उन्होंने विशेष स्कूल में दाखिला लिया ताकि वे अपनी ट्रेनिंग और पढ़ाई जारी रख सकें।


अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत

1976 में नेशनल स्कूल गेम्स में शानदार प्रदर्शन के बाद, उषा कोच ओएम नाम्बियार की निगाहों में आईं और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1980 में उनका अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू हुआ, जब उन्होंने कराची में आयोजित पाकिस्तान ओपन नेशनल मीट में चार स्वर्ण पदक जीते।


ओलंपिक और एशियाई खेलों में उपलब्धियां

पीटी उषा ने 1980, 1984 और 1988 के ओलंपिक में भाग लिया, लेकिन वह देश के लिए पदक लाने से थोड़े से अंतर से चूक गईं। 1984 के लॉस एंजेल्स ओलंपिक में, वह फाइनल तक पहुंचने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। एशियाई खेलों में उन्होंने कुल 11 पदक जीते, जिनमें 4 स्वर्ण शामिल थे। इसके अलावा, एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 23 पदक अपने नाम किए।


सम्मान और वर्तमान स्थिति

20 साल की उम्र में, उषा को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया और 1985 में उन्हें पद्म श्री से नवाजा गया। उन्हें 'पायोली एक्सप्रेस', 'भारत की उड़न परी', 'गोल्डन गर्ल' और 'क्वीन ऑफ ट्रैक एंड फील्ड' जैसे नामों से भी जाना जाता है। 2022 में, उन्हें भारतीय ओलंपिक संघ का अध्यक्ष चुना गया, और वह अब तक इस पद पर बनी हुई हैं।