पुणे में केतन अग्रवाल हत्या मामले में नए मोड़, आरोपी न्यायिक हिरासत में
केतन अग्रवाल की हत्या की जांच में प्रगति
पुणे के रियल एस्टेट व्यवसायी केतन अग्रवाल की हत्या से संबंधित मामले में जांच में लगातार नए पहलू सामने आ रहे हैं। हाल ही में, अदालत ने मुख्य संदिग्ध सिया गोयल और चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। पुलिस द्वारा अतिरिक्त रिमांड की मांग को अदालत ने अस्वीकार कर दिया। अब जांच एजेंसी मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
अदालत ने रिमांड बढ़ाने से किया इनकार
दोनों आरोपियों की पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट ए.एम. विभूते की अदालत में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने तीन दिन की अतिरिक्त पुलिस हिरासत की मांग की, यह कहते हुए कि मोबाइल फोन से मिली चैट में संकेतों और कोड जैसी भाषा का उपयोग किया गया है, जिसे समझने के लिए आगे पूछताछ आवश्यक है। बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पुलिस को पहले ही पर्याप्त समय मिल चुका है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अतिरिक्त रिमांड की मांग को अस्वीकार कर दिया।
जांच में तीसरे व्यक्ति की भूमिका
पुलिस की जांच में एक तीसरे व्यक्ति की पहचान हुई है, जो चेतन चौधरी का सहपाठी बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि उसे योजना के बारे में कितना पता था और घटना के बाद उसका आरोपियों के साथ संपर्क था या नहीं। पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर इन दावों की पुष्टि करने में लगी है। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है और उसके बयान की अन्य साक्ष्यों से तुलना की जा रही है।
डिजिटल साक्ष्यों पर निर्भर जांच
पुलिस ने सिया गोयल के घर से कुछ कपड़े भी बरामद किए हैं, जिन्हें घटना के दिन पहना गया था। इन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा, पुलिस ने उस स्थान की भी जांच की है, जहां घटना से पहले कथित तौर पर अभ्यास किया गया था। अधिकारी अब यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं कि वह गतिविधि कब हुई और वहां कौन-कौन मौजूद था। इन सभी पहलुओं की पुष्टि वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति की मांग
पुणे ग्रामीण पुलिस ने दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए अदालत से अनुमति मांगी है। पुलिस का कहना है कि यह प्रक्रिया अदालत की मंजूरी और आरोपियों की स्वैच्छिक सहमति के बाद ही संभव होगी। जांच एजेंसी का मानना है कि इससे आरोपियों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के बीच समानता की जांच करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल पुलिस मोबाइल डेटा, लोकेशन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और डिजिटल चैट समेत सभी तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर पूरे घटनाक्रम की सटीक समय-श्रृंखला तैयार करने में जुटी है।
