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पुदुचेरी: फ्रांस के चुनावों में भारतीय नागरिकों की भागीदारी

पुदुचेरी, भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश, अपनी अनूठी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जाना जाता है, जहां के निवासी फ्रांस के राष्ट्रपति और संसद के चुनावों में मतदान करते हैं। यह विशेष अधिकार ऐतिहासिक संधियों और नागरिकता के नियमों का परिणाम है। जानें कैसे पुदुचेरी के लोग इस प्रक्रिया में भाग लेते हैं और यह संबंध भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों को कैसे दर्शाता है।
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पुदुचेरी की अनोखी लोकतांत्रिक व्यवस्था


नई दिल्ली। भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित पुदुचेरी (Union Territory Puducherry) अपनी शांत फ्रांसीसी शैली की इमारतों और सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इस तटीय क्षेत्र में एक अनूठी लोकतांत्रिक प्रणाली भी कार्यरत है, जो वैश्विक स्तर पर अद्वितीय मानी जाती है। यहां के कई निवासी भारत में रहते हुए भी फ्रांस के राष्ट्रपति और संसद के चुनावों में मतदान करते हैं।


यह विशेष अधिकार ऐतिहासिक संधियों, कूटनीतिक समझौतों और नागरिकता के नियमों का परिणाम है।


पुदुचेरी 1954 तक फ्रांसीसी शासन के अधीन था। जब भारत सरकार ने यहां का नियंत्रण संभाला, तो 1962 में दोनों देशों के बीच एक औपचारिक संधि संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक परिवर्तन के दौरान स्थानीय निवासियों को यह विकल्प दिया गया कि वे भारतीय नागरिकता स्वीकार करें या अपनी फ्रांसीसी नागरिकता बनाए रखें। जिन्होंने अपनी पुरानी नागरिकता को चुना, उन्हें स्थानीय स्तर पर 'रेनोंसां' (Renonçants) कहा गया। इस कानूनी प्रावधान के तहत उन नागरिकों और उनके वंशजों को आज भी फ्रांस की वैध नागरिकता और सभी राजनीतिक अधिकार प्राप्त हैं।


भारत में फ्रांस का मतदान केंद्र


जब भी फ्रांस में राष्ट्रपति या संसदीय चुनाव होते हैं, पुदुचेरी में चुनावी गतिविधियां तेज हो जाती हैं। मतदान प्रक्रिया के लिए पुदुचेरी में फ्रांसीसी महावाणिज्य दूतावास (Consulate general of France) और 'लाइसी फ्रांसीसी' (Lycée Français) जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर आधिकारिक मतदान केंद्र स्थापित किए जाते हैं।


रिपोर्टों के अनुसार, पुदुचेरी, कराइकल, तमिलनाडु और केरल में लगभग 5000 से अधिक पंजीकृत फ्रांसीसी मतदाता निवास करते हैं। इनमें से अधिकांश पुदुचेरी के कराईकल, माहे और यानम में रहते हैं। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, पंजीकृत नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराकर इन विदेशी चुनावों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।


दो देशों के बीच लोकतांत्रिक संबंध


यह प्रणाली केवल चुनावी औपचारिकता नहीं है। भारत से डाला गया हर एक वोट सीधे पेरिस के एलीसी पैलेस (Élysée Palace) और फ्रांसीसी संसद के परिणामों को प्रभावित करता है। भारत और फ्रांस के बीच का यह सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंध आज भी पुदुचेरी के इतिहास को एक जीवित और अनोखी कहानी के रूप में प्रस्तुत करता है।