पुलिस स्मृति दिवस: बलिदान और कृतज्ञता का दिन
प्रधानमंत्री मोदी ने पुलिसकर्मियों को दी श्रद्धांजलि
आज, 21 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस' के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलिसकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा किया कि यह दिन उन पुलिसकर्मियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों से निपटने, आपात स्थितियों में सहायता करने और नागरिकों की सुरक्षा में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
गृह मंत्री अमित शाह का कार्यक्रम में योगदान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नेशनल पुलिस मेमोरियल में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस समारोह में भाग लिया। उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर, उन्होंने 'फाइट अगेंस्ट ड्रग्स' अभियान के तहत लगभग 90 पुलिसकर्मियों की बाइक रैली को भी रवाना किया। इस रैली में विभिन्न राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय पुलिस बलों के जवान शामिल हैं। यह रैली 31 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में समाप्त होगी।
पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास
हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाने का कारण 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में हुई एक घटना से जुड़ा है। उस समय भारतीय पुलिसकर्मी सीमा पर गश्त कर रहे थे, जब चीनी सैनिकों ने उन पर हमला किया। इस हमले में 10 भारतीय पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। उनके बलिदान की याद में हर साल इस दिन को मनाया जाता है। इस दिन ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अन्य पुलिसकर्मियों को भी श्रद्धांजलि दी जाती है।
लद्दाख में हुई घटना का विवरण
अक्टूबर 1959 में भारतीय पुलिसकर्मी भारत-तिब्बत सीमा पर निगरानी कर रहे थे। 20 अक्टूबर को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स से तीन टुकड़ियों ने गश्त के लिए प्रस्थान किया। इनमें से दो टुकड़ियां वापस लौट आईं, लेकिन तीसरी टुकड़ी के दो पुलिसकर्मी और एक पोर्टर लापता हो गए। इसके बाद, लापता साथियों की खोज के लिए एक टीम भेजी गई।
21 अक्टूबर 1959 को करम सिंह के नेतृत्व में लगभग 20 पुलिसकर्मियों की टीम लापता साथियों की खोज में आगे बढ़ी। इसी दौरान, चीनी सैनिकों ने उन पर गोलीबारी की और ग्रेनेड फेंके। इस हमले में 10 पुलिसकर्मी शहीद हो गए, जबकि सात को बंदी बना लिया गया। शहीद पुलिसकर्मियों के शव 13 नवंबर 1959 को भारत को लौटाए गए।
पुलिस स्मृति दिवस का औपचारिक निर्णय
लद्दाख में शहीद हुए पुलिसकर्मियों की याद में, जनवरी 1960 में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों के सम्मेलन में 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद से हर साल इस दिन शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह दिन उन सभी पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए जान गंवाई।
दिल्ली के चाणक्यपुरी में नेशनल पुलिस मेमोरियल स्थापित किया गया है, जहां पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद करने के लिए स्मारक और शहीदों के नाम दर्ज करने वाली 'वॉल ऑफ वेलर' मौजूद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर 2018 को इस स्मारक को देश को समर्पित किया था। हर साल पुलिस स्मृति दिवस पर यहां शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
