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पूर्व जस्टिस मनमोहन सिंह लिब्रहान का निधन, बाबरी विध्वंस आयोग के अध्यक्ष रहे

पूर्व जस्टिस मनमोहन सिंह लिब्रहान, जिन्होंने बाबरी विध्वंस की जांच के लिए आयोग की अध्यक्षता की, का निधन हो गया। 87 वर्ष की आयु में उनका निधन चंडीगढ़ में हुआ। लिब्रहान का जीवन और कार्य भारतीय न्यायपालिका में महत्वपूर्ण रहे हैं, विशेषकर बाबरी मस्जिद के विध्वंस की जांच में। उनकी रिपोर्ट ने राजनीतिक और कानूनी बहस को प्रभावित किया। जानें उनके योगदान और जीवन के बारे में अधिक जानकारी।
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मनमोहन सिंह लिब्रहान का निधन

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की जांच के लिए गठित आयोग के अध्यक्ष, पूर्व जस्टिस मनमोहन सिंह लिब्रहान का निधन हो गया। उन्होंने रविवार को चंडीगढ़ में 87 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें केवल परिवार के सदस्य और करीबी लोग शामिल हुए।


जस्टिस लिब्रहान का जीवन

मनमोहन सिंह लिब्रहान का जन्म 11 नवंबर 1938 को चंडीगढ़ के निकट हुआ। उन्होंने 1962 में वकालत की शुरुआत की और बाद में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बने। इसके बाद उन्हें मद्रास उच्च न्यायालय और फिर आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। रिटायरमेंट के बाद, उन्होंने कई महत्वपूर्ण आयोगों की अध्यक्षता की, जिसमें बाबरी मस्जिद के विध्वंस की जांच के लिए गठित आयोग भी शामिल था।


बाबरी विध्वंस की जांच

जस्टिस लिब्रहान तब सुर्खियों में आए जब उन्हें बाबरी मस्जिद के विध्वंस की जांच के लिए आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में मस्जिद के ढहाए जाने के बाद, तत्कालीन केंद्र सरकार ने 16 दिसंबर 1992 को इस घटना की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग का गठन किया। जस्टिस लिब्रहान को इस आयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई। आयोग को प्रारंभ में तीन महीने में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन जांच के दायरे के बढ़ने के कारण इसका कार्यकाल कई बार बढ़ाया गया।


17 वर्षों तक चली जांच

इस जांच आयोग को 'लिब्रहान आयोग' के नाम से जाना जाता है और यह भारत के सबसे लंबे समय तक चलने वाले जांच आयोगों में से एक रहा। आयोग ने लगभग 17 वर्षों तक सुनवाई की, सैकड़ों गवाहों के बयान दर्ज किए और अंततः 30 जून 2009 को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी। रिपोर्ट तैयार करने के लिए आयोग ने 399 से अधिक बैठकें कीं और कई बार समय बढ़ाया गया।


जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष

लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढहाया जाना एक आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि यह एक पूर्व नियोजित कार्रवाई थी। आयोग ने कई राजनीतिक नेताओं और संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाए। हालांकि, बाद में इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया अलग दिशा में बढ़ी, लेकिन जस्टिस लिब्रहान अपने निष्कर्षों पर अंत तक कायम रहे। उन्होंने कहा कि उनके सामने आए सबूत एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करते हैं।


भारतीय इतिहास में लिब्रहान आयोग

लिब्रहान आयोग भारतीय इतिहास के सबसे चर्चित जांच आयोगों में से एक माना जाता है। इसकी रिपोर्ट 2009 में संसद में पेश की गई थी और इसने बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी बहस को प्रभावित किया। जस्टिस एम.एस. लिब्रहान का नाम इस आयोग के कारण देशभर में जाना गया। अब 87 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया है।