पूर्व न्यायाधीशों का चुनाव आयोग के समर्थन में खुला पत्र, विपक्ष के प्रदर्शन पर उठाए सवाल
पूर्व न्यायाधीशों की चिंता
नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के 42 पूर्व न्यायाधीशों ने एक खुले पत्र के माध्यम से चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयासों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इन पूर्व न्यायाधीशों ने बिना ठोस प्रमाण के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को उठाते हुए कहा कि इस तरह के आरोप लोकतंत्र में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं।
संस्थाओं की आलोचना और लोकतंत्र
पत्र में कहा गया है, “संस्थाओं की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करना नहीं।” इस पत्र पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हेमंत गुप्ता और पंकज मित्तल सहित अन्य ने हस्ताक्षर किए हैं। पूर्व न्यायाधीशों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए इसे स्वच्छ और सटीक बनाए रखने का एक कानूनी अभ्यास बताया। पत्र में यह भी कहा गया कि “विश्वास लोकतंत्र की मुद्रा है।”
विपक्ष के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया
इस पत्र के जारी होने के समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष में साहस है, तो उन्हें उन सीटों से इस्तीफा दे देना चाहिए, जिन पर वे चुनाव जीत चुके हैं। राहुल गांधी ने हाल ही में जंतर-मंतर की ओर मार्च का नेतृत्व किया था, जहां उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया।
नितिन नबीन की टिप्पणी
नितिन नबीन ने कहा कि ये लोग समाज में जहर फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने केरल और तमिलनाडु में चुनाव कराए, जहां विपक्षी दलों ने जीत हासिल की। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी उन लोगों को संरक्षण देने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें वे घुसपैठिया मानते हैं।
