पूर्व बीजेपी सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने समाजवादी पार्टी में किया शामिल
धर्मेंद्र कश्यप का सपा में शामिल होना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। वे अपनी बेटी के साथ अखिलेश यादव की पार्टी में शामिल हुए। धर्मेंद्र कश्यप आंवला लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद रह चुके हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की उपस्थिति में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। धर्मेंद्र कश्यप का सपा में शामिल होना बरेली और आंवला क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूर्व सांसद श्री धर्मेंद्र कश्यप जी व उनकी सुपुत्री श्रीमती कीर्ति कश्यप के ‘पीडीए आंदोलन’ से जुड़ने से बरेली, रोहेलखंड व पूरे उप्र में हमारी शक्ति कई गुनी बढ़ गई है। हम उनका, उनके साथ आये अन्य सभी लोगों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं।
‘सबको सम्मान-सबको स्थान’ के अपने वचन के साथ हम हर एक को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे।
आज इन अर्थों में एक विशेष दिन है कि जो लोग कभी आमने-सामने चुनाव लड़े थे आज वो ‘पीडीए’ के बड़े उद्देश्यों के लिए समस्त प्रतिस्पर्धा भूलकर हाथ-में-हाथ डालकर एकजुट हो गये हैं।
पीडीए ही मिलकर, भाजपा के प्रभुत्ववाद का अंतिम अध्याय लिखेगा।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 27, 2026
धर्मेंद्र कश्यप बीजेपी के उन नेताओं में से हैं जिन्होंने पार्टी में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह आंवला लोकसभा सीट से 2014 और 2019 में सांसद चुने गए थे। इससे पहले, वह दो बार विधायक भी रह चुके हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा बहुजन समाज पार्टी से शुरू हुई थी, जहां वह 2002 में बीएसपी के टिकट पर विधायक बने। बाद में, 2003 में उन्होंने समाजवादी पार्टी में शामिल होकर मुलायम सिंह यादव की सरकार में राज्यमंत्री का पद संभाला।
इसके बाद, उन्होंने बीजेपी में शामिल होकर 2014 में आंवला से लोकसभा चुनाव जीता। 2019 में भी उन्होंने जीत हासिल की, लेकिन 2024 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हाल ही में, राज्यसभा के लिए बीजेपी द्वारा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के कारण उनकी नाराजगी की चर्चा हो रही थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर 'टाटा बाय-बाय' पोस्ट भी किया था। इसके बाद उनकी बीजेपी से दूरी और अखिलेश यादव से मुलाकात ने उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज कर दी थीं।
PDA फॉर्मूले को मजबूत करने में जुटे अखिलेश
सपा प्रमुख अखिलेश यादव इन दिनों पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। इसी कड़ी में पार्टी से नाराज होकर दूसरे दलों में गए नेताओं को वापस लाने की कोशिशें भी चल रही हैं। इससे पहले, बदायूं के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य भी अखिलेश यादव की उपस्थिति में सपा में शामिल हुए थे। खास बात यह रही कि उसी शाम बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में उनका नाम भी शामिल था। सिनोद शाक्य ने स्पष्ट किया कि वह अखिलेश यादव के साथ हैं और समाजवादी पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। धर्मेंद्र कश्यप और सिनोद शाक्य जैसे नेताओं के सपा में आने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के संगठन और सामाजिक समीकरणों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
