पेशावर में स्कूल की छत गिरने से 21 बच्चों की मौत, बचाव कार्य जारी
पेशावर में दर्दनाक हादसा
पेशावर। पाकिस्तान में गुरुवार को एक गंभीर घटना घटित हुई है। पेशावर में एक स्कूल की छत गिरने से कम से कम 21 बच्चों की जान चली गई है। इस दौरान कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया और बड़ी संख्या में घायलों को अस्पताल भेजा गया है। हालांकि, घायलों की संख्या अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। बचाव कार्य अभी भी जारी है। पाकिस्तान में इमारतों और छतों का गिरना एक सामान्य घटना बन चुका है। जुलाई में एक स्कूल की दीवार गिरने से तीन लड़कियों की मौत हो गई थी।
A tragic incident in Peshawar, where at least 16 students and teachers have died after the roof of a private school collapsed.
Our thoughts are with the victims and their grieving families
Rescue operations are ongoing#Peshawar #BreakingNews #Pakistan #SchoolCollapse https://t.co/h5kCPW26nt
— Sajjad Tarakzai (@SajjadTarakzai) October 15, 2026
यह दुखद घटना पेशावर के दीर कॉलोनी में एक निजी स्कूल में हुई। लेडी रीडिंग हॉस्पिटल के प्रवक्ता मोहम्मद आसिम ने बताया कि इस हादसे में 21 बच्चों की जान गई है। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी गई है। मृतकों में 20 छात्र और एक शिक्षिका शामिल हैं।
सभी मृतक 13 साल से कम उम्र के
आसिम ने बताया कि जिन बच्चों की जान गई है, उनकी उम्र 13 साल से कम है। इससे पहले रेस्क्यू 1122 के प्रवक्ता बिलाल अहमद फैजी ने कहा था कि छात्रों और शिक्षकों समेत लगभग 20 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने यह भी आशंका जताई थी कि मलबे में और बच्चे दबे हो सकते हैं।
हादसे का समय
रिपोर्ट के अनुसार, पेशावर उपायुक्त के कार्यालय ने बताया कि घटना के समय छात्र कक्षा में उपस्थित थे। खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैजल करीम कुंडी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने विस्तृत रिपोर्ट की मांग की है और अधिकारियों को घटना के कारणों का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने घायल बच्चों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है और बेहतरीन चिकित्सा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए हैं।
चश्मदीदों की बातें
समीउल्लाह नामक एक व्यक्ति ने बताया कि वह घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा, 'मैंने 8 साल से कम उम्र की तीन बच्चियों को बचाया। समय सुबह करीब 8:50 बजे था। मुझे फोन आया और वहां पहुंचने में 10 मिनट लगे। मैं सुबह 9 बजे के करीब वहां पहुंचा। हमारे 6 बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं।' उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इमारत को देखा, तो उन्हें लगा कि ग्राउंड फ्लोर पर पढ़ने वाला उनका बेटा मारा गया है, लेकिन वह पानी पीने के लिए कक्षा से बाहर निकल गया था।
