प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच बातचीत: शांति और सहयोग की उम्मीदें
मोदी और पेजेश्कियान के बीच फोन वार्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर संवाद किया। इस बातचीत में मोदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति की आवश्यकता पर जोर दिया और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की स्वतंत्रता की बात की। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने भारत में BRICS ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के सफल आयोजन की सराहना की और आशा व्यक्त की कि भविष्य में ईरान और भारत के बीच सहयोग और मजबूत होगा।
भारत का ईरान के प्रति शोक
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर भारत ने शोक व्यक्त किया है। भारत ने ईरान के साथ सहानुभूति जताई है। हाल ही में, पेजेश्कियान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे दोनों देशों के बीच दुश्मनी को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
बैठक में चर्चा के मुख्य बिंदु
होर्मुज स्ट्रेट, जो कि विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है, भारत के लिए तेल आयात का मुख्य स्रोत है। हाल के संघर्षों के दौरान इस मार्ग पर खतरे में वृद्धि हुई थी, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई। पीएम मोदी ने इस मार्ग पर जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही की आवश्यकता पर जोर दिया।
मोदी ने पेजेश्कियान को भारत में होने वाले BRICS लीडर्स समिट में आमंत्रित किया। भारत को उम्मीद है कि यह बैठक सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगी।
खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की भागीदारी
आयतुल्ला अली खामेनेई के निधन पर भारत ने शोक व्यक्त किया है। उनकी मृत्यु 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हवाई हमले में हुई थी। पीएम मोदी ने इस पर शोक प्रकट किया है और भारत एक विशेष प्रतिनिधिमंडल उनके अंतिम संस्कार में भेज रहा है। खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई को तेहरान में शुरू होगा और 9 जुलाई को मशहद में दफनाया जाएगा।
क्या पीएम मोदी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभवतः व्यक्तिगत रूप से अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाएंगे क्योंकि उनकी तीन देशों की यात्रा निर्धारित है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा करेंगे।
भारत का ईरान के प्रति दृष्टिकोण
ईरानी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के शांति प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर काम करना चाहिए और आक्रामकता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि सभी विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। पिछले कुछ महीनों में BRICS के स्तर पर दोनों देशों के बीच संवाद बना रहा है, जो क्षेत्र में शांति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
