प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा सपना: 2047 तक विकसित भारत का निर्माण
प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत अब छोटे सपनों के साथ आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए बड़ी आकांक्षाओं और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता पर जोर दिया।
मोदी ने गुलामी की मानसिकता को समाप्त करने का आह्वान किया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाबासाहेब आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बिरसा मुंडा और ज्योतिबा फुले के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेने की बात कही।
लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि अब छोटे सपनों से आगे बढ़ने का समय नहीं है। बड़े सपने हमारी सोच को विस्तारित करते हैं और हमें कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता प्रदान करते हैं।
मोदी ने कहा कि जब हमारे सपने ऊंचे होते हैं, तो हमारे संकल्प भी ऊंचे होते हैं, जिससे हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ने एक बड़ा सपना देखा है, जो 2047 में आजादी के 100 साल पूरे होने पर विकसित भारत बनने का है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के प्रयासों से हमें इस लक्ष्य को हासिल करना है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है, तो यह वैश्विक स्तर पर हमारे साहस का परिचायक बन जाता है।
मोदी ने कहा कि देश आजाद हुआ, लेकिन हम गति नहीं पकड़ पाए। उन्होंने बताया कि भारत पहले 'फ्रेजाइल फाइव' देशों में गिना जाता था, लेकिन अब यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।
उन्होंने अपने 'पंच प्रण' का उल्लेख करते हुए कहा कि ये संकल्प राष्ट्र को अपार शक्ति प्रदान करते हैं और आत्म गौरव की भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
मोदी ने कहा कि आइए, हम सब मिलकर एक विकसित भारत का निर्माण करें।
