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प्रधानमंत्री मोदी की किर्गिस्तान यात्रा: भारत की विदेश नीति में नई दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया किर्गिस्तान यात्रा ने भारत की विदेश नीति में नई चर्चाएँ उत्पन्न की हैं। बिश्केक में हुई महत्वपूर्ण बैठकों में ईरान, आर्मीनिया और किर्गिस्तान के नेताओं के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा की गई। इस यात्रा का महत्व तब और बढ़ गया जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। जानें, चाबहार बंदरगाह और मध्य एशिया में भारत की रणनीति के बारे में।
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भारत की विदेश नीति पर नई चर्चाएँ


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया किर्गिस्तान यात्रा ने भारत की विदेश नीति पर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। बिश्केक में, पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के साथ महत्वपूर्ण वार्ताएँ कीं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सहयोग और रणनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।


सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए का रक्षा समझौता

इन वार्ताओं का महत्व तब और बढ़ गया जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने अगस्त में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के अनुसार, यदि किसी सदस्य पर सशस्त्र हमला होता है, तो इसे तीनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा। हालांकि, संबंधित देशों ने इसे किसी विशेष देश के खिलाफ गठबंधन नहीं बताया है।


ईरान के साथ चाबहार पर ध्यान केंद्रित

भारत के लिए ईरान केवल पश्चिम एशिया का एक महत्वपूर्ण देश नहीं है, बल्कि यह कनेक्टिविटी के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण साझेदार है। चाबहार बंदरगाह के माध्यम से, भारत पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। चाबहार को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।


आर्मीनिया की बढ़ती अहमियत

आर्मीनिया भी भारत की रणनीतिक सोच में तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भारत, ईरान और आर्मीनिया के बीच पहले से ही कनेक्टिविटी को लेकर त्रिपक्षीय बातचीत हो चुकी है। इसमें INSTC, चाबहार बंदरगाह और आर्मीनिया की 'क्रॉसरोड्स ऑफ पीस' पहल जैसे मुद्दों पर सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया गया है।


मध्य एशिया पर भारत की नजर

किर्गिस्तान के साथ बातचीत भारत की मध्य एशिया नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस क्षेत्र में व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है। इस प्रकार, भारत किसी नए सैन्य गुट का हिस्सा बनने के बजाय विभिन्न देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है। ईरान के साथ कनेक्टिविटी, आर्मीनिया के साथ सहयोग और मध्य एशिया में बढ़ती भागीदारी को इसी व्यापक रणनीति के तहत देखा जा सकता है।