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प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं पर खर्च का ब्योरा संसद में पेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर खर्च का ब्योरा हाल ही में संसद में प्रस्तुत किया गया। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2021 के बाद से इन यात्राओं पर खर्च में लगातार वृद्धि हुई है। सरकार ने बताया कि इन दौरों के माध्यम से कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो भारत के लिए निवेश और वैश्विक सहयोग के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जानिए इस रिपोर्ट में और क्या-क्या जानकारी दी गई है।
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प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का खर्च


नई दिल्ली: राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर होने वाले खर्च का विवरण प्रस्तुत किया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2021 के बाद से इन यात्राओं पर खर्च में लगातार वृद्धि देखी गई है। सरकार ने यह भी बताया कि इन दौरों के माध्यम से कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों और निवेश के अवसरों का लाभ देश को मिला है।


संसद में खर्च के आंकड़े

विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने एक लिखित उत्तर में बताया कि 2021 से अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर कुल 550 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुका है। मंत्रालय के अनुसार, 2021 में यह खर्च 36 करोड़ रुपये से अधिक था, जो 2022 में 55 करोड़, 2023 में 93 करोड़, 2024 में 109 करोड़ और 2025 में बढ़कर 180 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वर्ष 2026 में अब तक 74.58 करोड़ रुपये से अधिक खर्च दर्ज किया गया है, हालांकि कुछ यात्राओं का अंतिम हिसाब अभी जोड़ा जाना बाकी है।


कौन सी यात्रा पर हुआ सबसे अधिक खर्च

विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2026 में शामिल खर्च के आंकड़ों में मई में प्रधानमंत्री के पांच देशों के दौरे का विवरण भी शामिल है। इस दौरान नॉर्वे यात्रा पर सबसे अधिक 17.46 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं, जून में फ्रांस यात्रा का अंतिम व्यय अभी निर्धारित नहीं हुआ है, इसलिए उसे कुल आंकड़ों में पूरी तरह शामिल नहीं किया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कुछ आंकड़े फिलहाल अस्थायी हैं और अंतिम ऑडिट के बाद इनमें बदलाव संभव है।


सरकार का खर्च पर दृष्टिकोण

विदेश मंत्रालय का कहना है कि विदेश यात्राओं को केवल खर्च के रूप में नहीं देखना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2021 से अब तक इन दौरों के दौरान 316 समझौता ज्ञापनों (MoU) और विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें रक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, अक्षय ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, अंतरिक्ष सहयोग, जलवायु कार्रवाई और सांस्कृतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।


निवेश और वैश्विक सहयोग पर ध्यान

सरकार ने यह भी बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को 381.8 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ। मंत्रालय का कहना है कि विदेश यात्राओं ने वैश्विक निवेशकों के साथ संबंध मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार के अनुसार, इन दौरों के माध्यम से भारत की वैश्विक भागीदारी मजबूत हुई है और विभिन्न क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर भी खुले हैं।