प्रधानमंत्री मोदी के कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज, क्या होगा बड़ा बदलाव?
कैबिनेट विस्तार की संभावनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में बदलाव को लेकर चर्चाएं बढ़ती जा रही हैं। पहले यह कहा गया था कि 28 से 30 जून के बीच विस्तार हो सकता है, लेकिन अब यह लगातार टलता जा रहा है। यह कोई नई बात नहीं है कि मोदी सरकार के महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी तब तक नहीं मिलती जब तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती।
राजनीतिक गलियों में चर्चा
कई बार ये घोषणाएं जनता को चौंका देती हैं। अब एक नया दावा सामने आया है, जिसके चलते कैबिनेट विस्तार की अटकलें और तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों से लेकर अधिकारियों तक, इस विषय पर चर्चा हो रही है।
अचानक अटकलों का बढ़ना
अचानक फिर क्यों तेज हुईं अटकलें?
- पहली वजह: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के निदेशक तपन डेका के सम्मान में एक डिनर का आयोजन किया। शाह ने सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम की तस्वीरें साझा कीं और डेका की सराहना की। रिटायरमेंट के बाद डेका को कोई महत्वपूर्ण केंद्रीय जिम्मेदारी मिल सकती है। यदि ऐसा होता है, तो मौजूदा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को केंद्र की कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।
- दूसरी वजह: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मंत्री भूपेंद्र यादव के चार प्रमुख निजी सहायकों को हटा दिया गया है। भूपेंद्र यादव को भाजपा में एक मजबूत रणनीतिकार माना जाता है, इसलिए यह कदम चौंकाने वाला था। विपक्षी कांग्रेस ने इस पर सरकार पर हमला किया है।
कैबिनेट विस्तार में देरी के कारण
क्या कैबिनेट में होने वाला है बदलाव फिर देरी क्यों?
सूत्रों के अनुसार, मानसून सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार की घोषणा नहीं की जाएगी। सरकार इस समय केंद्रीय कानूनों और संसदीय कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी का विदेश दौरा भी इस प्रक्रिया में देरी का एक कारण बन रहा है।
2021 जैसा चौंकाने वाला फैसला?
क्या 2021 की तरह चौंकाएगा फैसला?
सूत्रों का कहना है कि 2021 के कैबिनेट विस्तार की तरह, इस बार भी कुछ अप्रत्याशित हो सकता है। जुलाई 2021 में संसदीय सत्र शुरू होने से पहले मोदी सरकार ने कैबिनेट में बड़े बदलाव किए थे। कई पुराने चेहरों को हटाया गया था और नए चेहरों को मौका दिया गया था। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल सकता है।
