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प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि की अगुवाई में टास्क फोर्स का गठन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर काम करेगी और इसकी रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पीएम मोदी ने छात्रों के आंदोलन के बाद लगातार वीडियो संदेश जारी किए हैं, जिसमें उन्होंने परीक्षा सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है। जानें नंदन नीलेकणि के बारे में और इस टास्क फोर्स के उद्देश्यों के बारे में।
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परीक्षा सुधारों के लिए नया कदम


नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो साझा किए हैं। रविवार को उन्होंने एक वीडियो संदेश में बताया कि परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निरंतर महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे, वे अब जेल में हैं।


प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर कार्य करेगी। इसकी रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य की परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।


गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद के बाद से पीएम मोदी ने लगातार वीडियो संदेश जारी किए हैं। उनका पहला वीडियो 23 जुलाई को रात 11:52 बजे आया था, इसके बाद 24 जुलाई को एक और वीडियो जारी किया गया। अब रविवार को पीएम मोदी ने एक नया वीडियो साझा किया है, जो एक मिनट 20 सेकंड लंबा है। इस वीडियो की शुरुआत भी उन्होंने 'फ्रेंड्स' कहकर की है।




नंदन नीलेकणि का परिचय
नंदन नीलेकणि का जन्म 2 जून, 1955 को बंगलूरू में हुआ था। वे भारत के प्रमुख उद्यमियों, तकनीकी विशेषज्ञों और सार्वजनिक नीति के नेताओं में से एक माने जाते हैं। वे विशेष रूप से इंफोसिस के सह-संस्थापक और भारत की डिजिटल पहचान परियोजना Unique Identification Authority of India (UIDAI) के पहले अध्यक्ष के रूप में जाने जाते हैं। नंदन नीलेकणि 2002 से 2007 तक इंफोसिस के CEO रहे और बाद में कंपनी के चेयरमैन भी बने। उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में 'आधार' परियोजना का नेतृत्व करने का श्रेय दिया जाता है। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया है। इसके अलावा, वे डिजिटल साक्षरता मंच एकेस्टेप (EkStep) के सह-संस्थापक भी हैं।