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प्रह्लाद जोशी बने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री: शिक्षा प्रणाली में सुधार की चुनौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में कैबिनेट फेरबदल के बाद प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद सौंपा गया है। जोशी को शिक्षा प्रणाली में सुधार की चुनौती का सामना करना होगा, जिसमें NEP 2020 का कार्यान्वयन और पेपर लीक की समस्या शामिल है। नए मंत्री के सामने छात्रों का विश्वास बहाल करना, डिजिटल शिक्षा का बुनियादी ढांचा मजबूत करना और भारतीय विश्वविद्यालयों का अंतर्राष्ट्रीयकरण करना प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी। जानें इस बदलाव के पीछे की कहानी और जोशी की नई भूमिका के बारे में।
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नई दिल्ली में कैबिनेट में बदलाव


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में हाल ही में हुए कैबिनेट फेरबदल के तहत प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद सौंपा गया है। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान की जगह ली है, जिन्होंने NEET-UG में हुई गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दिया। जोशी इससे पहले उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे थे।  


शिक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता

NEP 2020 और पेपर लीक की समस्या   


यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारत की शिक्षा प्रणाली महत्वपूर्ण परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने और स्कूलों के लिए नया पाठ्यक्रम लाने में जुटी है। दूसरी ओर, NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक के आरोपों ने छात्रों और अभिभावकों का विश्वास हिला दिया है। नए मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास पुनर्स्थापित करना है।  


NTA में सुधार और डिजिटल परीक्षा की दिशा

NTA में बड़े बदलाव, डिजिटल परीक्षा की तैयारी    


NEET विवाद के बाद सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन शुरू कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रक्रिया में लगभग 47 अधिकारियों को हटाया गया है। सरकार ने परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी और मजबूत तकनीकी सुरक्षा लगाने का प्रस्ताव दिया है।


इसका उद्देश्य पेपर लीक को रोकना और राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं को सुरक्षित बनाना है। इसके साथ ही, NEET-UG जैसी प्रमुख परीक्षाओं को धीरे-धीरे कंप्यूटर आधारित मोड में स्थानांतरित करने की योजना भी बनाई जा रही है। मंत्रालय डिजिटल शिक्षा का बुनियादी ढांचा बढ़ाने, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने और भारतीय विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।  


ब्यूरोक्रेसी में बदलाव

ब्यूरोक्रेसी में भी हुआ बड़ा फेरबदल   


शिक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों में भी बदलाव किए गए हैं। उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को पंचायती राज मंत्रालय भेजा गया है। उनकी जगह नरेश पाल गंगवार नए उच्च शिक्षा सचिव बने हैं। गंगवार 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS हैं और पहले पशुपालन विभाग देख रहे थे।  


स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की जिम्मेदारी अब टी.के. अनिल कुमार के पास है। वे 1995 बैच के कर्नाटक कैडर के IAS हैं और पहले ग्रामीण विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव थे। परीक्षा विवादों के बाद मंत्रालय और NTA के कार्यों में सुधार के लिए किए गए ये प्रशासनिक बदलाव नई शुरुआत का संकेत माने जा रहे हैं।  


जोशी की नई जिम्मेदारियां

जोशी के सामने 3 बड़ी जिम्मेदारियां   



  1. भरोसा बहाल करना - पेपर लीक के बाद छात्रों को भरोसा दिलाना कि अब परीक्षाएं पारदर्शी होंगी  

  2. NEP 2020 को जमीन पर उतारना - नई शिक्षा नीति और नया स्कूल पाठ्यक्रम समय पर लागू करना  

  3. डिजिटल और ग्लोबल शिक्षा - ऑनलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना और भारतीय संस्थानों का अंतर्राष्ट्रीयकरण  


सरकार को उम्मीद है कि जोशी के अनुभव से शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों को गति मिलेगी।