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प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, अधिकारियों के साथ की बैठक

प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया है, जो नीट छात्रों और CJP के लंबे आंदोलन के बाद हुआ। जोशी, जो बीजेपी के अनुभवी नेताओं में से एक हैं, ने अपनी राजनीतिक यात्रा धारवाड़ से शुरू की थी और लगातार पांच बार सांसद बने हैं। उनके पास संगठन और सरकार में काम करने का व्यापक अनुभव है, जो उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त बनाता है। जानें उनके राजनीतिक सफर और मंत्रालय में उनकी योजनाओं के बारे में।
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नई जिम्मेदारी का आगाज़

नई दिल्ली: नीट छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 36 दिनों के लंबे आंदोलन के बाद, शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को औपचारिक रूप से शिक्षा मंत्री का कार्यभार ग्रहण किया। पदभार संभालते ही उन्होंने मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त बैठक की, जिसमें कार्यों का अवलोकन किया गया। प्रह्लाद जोशी के पास पहले से मौजूद नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी।


राजनीतिक अनुभव और संगठन में गहरी पैठ

प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अनुभवी नेताओं में से एक माने जाते हैं। संसद में उनकी सक्रियता और रणनीति अक्सर चर्चा का विषय रहती है। उन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़कर संगठन में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। जोशी ने अपनी राजनीतिक यात्रा कर्नाटक के धारवाड़ जिले से शुरू की थी, जहां उनके जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों के लिए उन्हें 2004 के आम चुनाव में लोकसभा टिकट मिला।


धारवाड़ से लगातार सांसद

प्रह्लाद जोशी ने 2004 में धारवाड़ सीट से जीत हासिल की और तब से उन्होंने लगातार पांच लोकसभा चुनावों में सफलता प्राप्त की है। पिछले 22 वर्षों से वह लोकसभा सांसद हैं, जिससे उनकी कर्नाटक में लोकप्रियता और प्रभाव बढ़ा है। केंद्र सरकार ने उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना है, जो उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को दर्शाता है।


महत्वपूर्ण मंत्रालयों का अनुभव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपना एक सोच-समझकर लिया गया निर्णय है, क्योंकि उनके पास संगठन और सरकार दोनों में काम करने का व्यापक अनुभव है। वह 2012 में कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और 2014 के बाद कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 2019 में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान, उन्होंने संसदीय कार्य, कोयला और खनन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी सफलतापूर्वक निभाई।