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फर्जी ब्रिगेडियर आर्यन वर्मा का UPSC छात्रों को ज्ञान देने वाला वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक 21 वर्षीय युवक आर्यन वर्मा, जो खुद को भारतीय सेना का ब्रिगेडियर बताता था, का एक वीडियो वायरल हो गया है। इस वीडियो में वह UPSC छात्रों को सफलता के टिप्स दे रहा है, जबकि वह नीट की परीक्षा में दो बार असफल हो चुका है। उसकी एक गलती से उसकी सच्चाई उजागर हो जाती है, जब वह डीएम के बारे में गलत जानकारी देता है। जानें कैसे उसने फर्जी पहचान बनाई और पुलिस ने उसे कैसे पकड़ा।
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शाहजहांपुर में फर्जी ब्रिगेडियर का मामला

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 21 वर्षीय युवक, आर्यन वर्मा, जो भारतीय सेना का फर्जी ब्रिगेडियर बनकर लोगों पर रौब झाड़ रहा था, का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह युवक, जो नीट (NEET) की परीक्षा में दो बार असफल हो चुका है, इस वीडियो में यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता के टिप्स देते हुए नजर आ रहा है। आर्यन छात्रों को सलाह देता है कि जीवन में संवाद और मानसिकता को अपडेट रखना आवश्यक है, तभी नए विचार उत्पन्न होते हैं।


आर्यन की जुबान से निकली गलती

बातों में फिसली जुबान: वायरल वीडियो में आर्यन छात्रों से बातें करते हुए कहता है कि लोग उसे देखकर सोचेंगे कि वे भी उसकी तरह रुतबे वाले बन सकते हैं। लेकिन उसने एक ऐसी गलती कर दी जिससे उसकी सच्चाई उजागर हो गई। उसने कहा कि जब वह चौथी या पांचवीं कक्षा में था, तब जिले में अमृत त्रिपाठी नाम के डीएम थे। इस पर किसी ने उसे टोक दिया कि अमृत त्रिपाठी तो 2018 में डीएम बने थे, तब वह चौथी या पांचवीं में कैसे हो सकता है? अपनी गलती पकड़े जाने पर आर्यन ने तुरंत सफाई दी कि वह तब 10वीं या 12वीं में था।


फर्जी पहचान का खुलासा


आर्यन का असली मकसद

डॉक्टर नहीं, गनमैन बनना था लक्ष्य: इस फर्जी ब्रिगेडियर ने अपनी झूठी कहानी में बताया कि उसका सपना हमेशा से मेडिकल क्षेत्र में जाने का था, लेकिन एक बार अपने पिता के साथ डीएम की मीटिंग में जाने के बाद उसका मन बदल गया। उसने डीएम को काले कोट में देखकर और उनके साथ गनमैन और लग्जरी गाड़ियां देखकर तय किया कि उसे डॉक्टर नहीं, बल्कि गनमैन और गाड़ी चाहिए।


नीट में असफलता से फर्जी ब्रिगेडियर बनने तक

नीट में असफलता: आर्यन वर्मा, जो खुद को सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताता था, वास्तव में नीट की परीक्षा में असफल छात्र है। उसने बताया कि वह दो साल तक दिल्ली में नीट की तैयारी कर रहा था, लेकिन असफलता के बाद उसने फर्जीवाड़ा करने का निर्णय लिया। अपनी पहचान को सच साबित करने के लिए उसने सेना की फर्जी वर्दी बनवाई और दो बाउंसर और एक ड्राइवर किराए पर लिया। इसी फर्जी पहचान के सहारे वह लोगों को धोखा देता रहा, लेकिन अंततः पुलिस ने उसे पकड़ लिया।