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फर्जी वीडियो के जरिए चीन के कब्जे का झूठा दावा, भारतीय सेना ने किया खंडन

हाल ही में भारतीय सेना ने एक फर्जी वीडियो का खंडन किया है, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया के नाम से चीन के कब्जे का झूठा दावा किया गया था। सेना ने स्पष्ट किया है कि यह वीडियो संपादित किया गया है और गिरीश कालिया ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। जानें इस मामले की पूरी सच्चाई और वीडियो का असली संदर्भ।
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भारतीय सेना का स्पष्टीकरण

हाल ही में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच हालिया टकराव की जानकारी दी। उनके बयान के बाद, कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि टकराव अभी भी जारी हैं। हालांकि, इन दावों के साथ कई फर्जी वीडियो, तस्वीरें और जानकारी भी साझा की जा रही हैं। एक ऐसा वीडियो लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया के नाम से प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि अरुणाचल प्रदेश के तीन स्थानों पर चीन ने कब्जा कर लिया है। भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि यह वीडियो संपादित किया गया है और गिरीश कालिया ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है।


गलत जानकारी का फैक्ट चेक

भारतीय सेना ने इस वीडियो का फैक्ट चेक करते हुए बताया कि यह गलत जानकारी फैलाने का प्रयास है। सेना ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी वीडियो को साझा करने से पहले असली भाषण को देखें। सेना ने इसे गलत सूचना फैलाने का एक तरीका बताया है। उनके अनुसार, पुरानी ब्रीफिंग, डिजिटल रूप से संपादित बयान, और फर्जी दावे इस तरह की गलत जानकारी फैलाने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं।


वायरल वीडियो की सच्चाई

इस एडिटेड वीडियो में दिखाया गया है कि लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया एक बयान दे रहे हैं, जिसमें वह कहते हैं, 'यह शर्मनाक है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के अस्फिला, लोंगजू और ताक्सिंग सर्कल पर कब्जा कर लिया है।' हालांकि, यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है। सेना ने गिरीश कालिया का असली वीडियो भी साझा किया है, जो 27 अक्टूबर 2023 को एक मीडिया चैनल के X हैंडल पर पोस्ट किया गया था। इस वीडियो में वह जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के प्रयासों का जिक्र कर रहे थे, और इसमें चीन या अरुणाचल प्रदेश का कोई उल्लेख नहीं है।