फारस की खाड़ी में जहाजों के नीचे छिपा खतरा: महासागरों के लिए गंभीर परिणाम
दुनिया के महासागरों पर मंडराता संकट
दुबई: फारस की खाड़ी में मिसाइलों और बम धमाकों के बीच एक अनदेखी और विनाशकारी स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिसका प्रभाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी पृथ्वी के महासागरों को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले चार महीनों से चल रही भीषण लड़ाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य, जो कि विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है, को पूरी तरह से ठप कर दिया है। यहां 1500 से अधिक विशाल वाणिज्यिक जहाज अब केवल लोहे के ढांचे नहीं रह गए हैं, बल्कि ये एक खतरनाक 'बायो-बम' में बदल चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन ने चेतावनी दी है कि इन जहाजों के निचले हिस्से में पनप रहे रहस्यमयी समुद्री जीव वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
600 अरब डॉलर के व्यापारिक मार्ग पर खतरनाक 'सुपर-स्प्रेडर'
अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी 2026 से जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाला लगभग 600 अरब डॉलर का समुद्री ऊर्जा व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया है। इस स्थिति के कारण फारस और ओमान की खाड़ी में 1500 से अधिक जहाज महीनों से एक ही स्थान पर खड़े हैं। जहाजों के निचले हिस्से पर काई, शंख, घोंघे और बार्नकल जैसे सूक्ष्मजीवों की मोटी परत जम गई है, जिसे वैज्ञानिक 'बायोफाउलिंग' कहते हैं। मैरीलैंड विश्वविद्यालय और वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन के वैज्ञानिकों ने इसे महासागरों के लिए एक गंभीर 'सुपर-स्प्रेडर' घटना बताया है।
जंग के बाद होगा विनाशकारी जैविक हमला
समुद्री वैज्ञानिकों का मानना है कि जब युद्ध समाप्त होगा और ये जहाज विभिन्न देशों के बंदरगाहों की ओर बढ़ेंगे, तो वे अपने साथ इन खतरनाक विदेशी प्रजातियों को भी ले जाएंगे। ये जीव अन्य देशों के तटीय क्षेत्रों में पहुंचकर स्थानीय समुद्री प्रजातियों और जैव विविधता को नष्ट कर सकते हैं। इसका एक बड़ा उदाहरण 'एशियन ग्रीन मसल' है, जिसने कैरिबियन और दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थानीय समुद्री जीवन को समाप्त कर दिया था। इसके अलावा, ये आक्रामक जीव विश्व के बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
जहाजों की गति में कमी और प्रदूषण में वृद्धि
जहाजों के निचले हिस्से पर जमी जीवों की मोटी परत न केवल जैव विविधता के लिए खतरा है, बल्कि समुद्री परिवहन की गति और पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा संकट बन चुकी है। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (आईएमओ) के आंकड़ों के अनुसार, जहाज के निचले हिस्से पर जमी काई की एक पतली परत भी घर्षण को बढ़ा देती है, जिससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। यदि यह परत बार्नकल जैसे कठोर जीवों की हो, तो जहाज के ईंधन की खपत 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाती है, जिससे वैश्विक प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ सकता है।
समुद्र की गहराइयों में सफाई अभियान
अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुसार, किसी भी जहाज को 30 दिनों से अधिक समय तक एक ही स्थान पर खड़े रहने पर उसकी सफाई करना अनिवार्य है, जबकि खाड़ी में फंसे इन जहाजों को चार महीने से अधिक हो चुके हैं। अब इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए विशेष गोताखोरों की मदद ली जा रही है, जो समुद्र की गहराइयों में उतरकर जहाजों के निचले हिस्सों को साफ कर रहे हैं। इस प्रक्रिया के चलते एक जहाज की सफाई का खर्च 60 प्रतिशत तक बढ़कर लगभग 8,000 डॉलर (करीब 6.5 लाख रुपये) तक पहुंच गया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो दुनिया को एक ऐसी प्राकृतिक और जैविक आपदा का सामना करना पड़ेगा, जिसकी भरपाई करना असंभव होगा।
