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फिलिस्तीन के राजदूत ने भारत से चिकित्सा सहायता की उम्मीद जताई

फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने भारत से चिकित्सा सहायता की उम्मीद जताई है, यह कहते हुए कि गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर आरोप लगाया कि वह फिलिस्तीन के मुद्दे को हल करने में पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है। गाजा में मानवीय स्थिति बेहद गंभीर है, जहां अस्पतालों की संख्या कम हो गई है और बच्चों की जानें जा रही हैं। भारत के समर्थन की उम्मीद के साथ, उन्होंने फिलिस्तीन की स्वास्थ्य प्रणाली की स्थिति पर भी प्रकाश डाला।
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भारत से चिकित्सा सहायता की अपेक्षा

नई दिल्ली: फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने गुरुवार को कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत जल्द ही चिकित्सा सहायता भेजेगा, क्योंकि फिलिस्तीन की स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है।


एक इंटरव्यू में, अबू शावेश ने बताया कि गाजा में मानवीय स्थिति 'बहुत गंभीर' है। गाजा के 36 अस्पतालों में से केवल 17 ही कुछ हद तक कार्यरत हैं। पिछले अक्टूबर में युद्धविराम की घोषणा के बाद से 1,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की जान जा चुकी है।


उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर आरोप लगाया कि वह फिलिस्तीन के मुद्दे को हल करने में पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है। उन्होंने भारत के दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन और शांति प्रक्रिया में नई दिल्ली की भूमिका का भी उल्लेख किया।


सवाल: भारत से दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की मांग के बारे में बताएं?


जवाब: इजरायली युद्ध शुरू होने के बाद से, भारत ने फिलिस्तीन को बड़ी मात्रा में दवाइयां और चिकित्सा सामग्री भेजी हैं। मैंने हाल ही में फिलिस्तीन दूतावास में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें मैंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की थी कि वे फिलिस्तीनी लोगों की मदद के लिए आगे आएं। मुझे विश्वास है कि भारत सरकार जल्द ही महत्वपूर्ण कदम उठाएगी।


सवाल: गाजा की मौजूदा मानवीय स्थिति को आप कैसे देखते हैं?


जवाब: गाजा में मानवीय स्थिति बेहद खराब है। इजरायली युद्ध के लगभग 1,000 दिन पूरे होने को हैं। गाजा में बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। लगभग 700,000 छात्रों ने दो साल की पढ़ाई खो दी है। हाल की संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में लगभग 5,000 बच्चों के शव मलबे में दबे हुए हैं।


सवाल: फिलिस्तीन को संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से क्या उम्मीदें हैं?


जवाब: हम चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन मानवीय सहायता और निगरानी में सक्रिय रहें। हमें उम्मीद है कि वे फिलिस्तीन में चल रही गंभीर स्थिति पर विस्तृत रिपोर्टें जारी करेंगे।


सवाल: क्या आपको लगता है कि हालिया संकट के कारण फिलिस्तीन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय एजेंडे से पीछे चला गया है?


जवाब: हां, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध के कारण हमारा मुद्दा प्राथमिकता में नहीं रहा। पहले फिलिस्तीनी संघर्ष और गाजा का मुद्दा चर्चा का विषय था, लेकिन अब यह अमेरिका-इजरायल-ईरान का मामला बन गया है।


सवाल: भारत और फिलिस्तीन के संबंधों को आप कैसे देखते हैं?


जवाब: हमें पूरा विश्वास है कि भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है। भारत हमेशा से फिलिस्तीनी लोगों के साथ खड़ा रहा है और फिलिस्तीन में कई विकास परियोजनाओं पर काम कर रहा है।