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बच्चों के अवैध गोद लेने के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और जागरूकता अभियान

देश में बच्चों के अवैध गोद लेने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया है। हाल ही में CARA ने जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें बच्चों की सुरक्षा के लिए समय पर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, हर दिन औसतन 269 बच्चे लापता हो रहे हैं। जानें इस गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की क्या कार्रवाई है और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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बच्चों के अवैध गोद लेने की समस्या

देश में अवैध तरीके से बच्चों को गोद लेने की घटनाएं चिंता का विषय बन गई हैं। 11 सितंबर को दिल्ली में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) ने इस मुद्दे पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। वहीं, 10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के अपहरण के बढ़ते मामलों पर केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया।


बच्चों के गायब होने की बढ़ती घटनाएं

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि पुलिस अक्सर बच्चों के गायब होने की रिपोर्ट तुरंत दर्ज नहीं कर पाती, जिससे जांच में देरी होती है। इससे किडनैप हुए बच्चों को वापस पाने की संभावना कम हो जाती है और मानव तस्करी, यौन शोषण, जबरन मजदूरी, और अवैध गोद लेने का खतरा बढ़ जाता है।


हर दिन औसतन 269 बच्चे लापता

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष देशभर में 98,375 बच्चे लापता हुए, जो कि हर दिन लगभग 269 बच्चों के गायब होने का संकेत है। यह आंकड़ा 2023 की तुलना में 7.8% अधिक है, जिसमें से 76.8% लड़कियां थीं। इसी वर्ष अपहरण के 96,079 मामले दर्ज हुए, जिनमें 76,761 बच्चे शामिल थे।


सुप्रीम कोर्ट में याचिका

वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें लापता बच्चों के मामलों में पुलिस और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि कई बार बच्चों के गायब होने की शिकायत को केवल 'गुमशुदा' के रूप में दर्ज किया जाता है, जिससे आपराधिक जांच में देरी होती है।


सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल

बच्चों के गायब होने के बाद का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि यदि FIR दर्ज करने में देरी होती है, तो बच्चे को ढूंढना और सुरक्षित वापस लाना मुश्किल हो सकता है। इस दौरान बच्चे मानव तस्करी, यौन शोषण, या अवैध गोद लेने का शिकार हो सकते हैं।


CARA का जागरूकता अभियान

11 सितंबर को CARA ने अवैध गोद लेने के मामलों को रोकने के लिए दिल्ली में एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें लगभग 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें पुलिस, अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग, बाल कल्याण समितियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया। कार्यशाला में बच्चों की सुरक्षा के लिए समय पर कार्रवाई और बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया गया।