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बस्तर में दीपावली: पीएम मोदी ने सुरक्षा बलों के साथ मनाया त्योहार, नक्सलवाद पर मिली बड़ी जीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर में दीपावली का त्योहार मनाते हुए सुरक्षा बलों के योगदान की सराहना की। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता का जिक्र करते हुए बताया कि अब देश का कोई भी जिला नक्सलवाद से प्रभावित नहीं है। मोदी ने सुरक्षा बलों के बलिदान को सम्मानित किया और कहा कि सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के प्रयास किए हैं। यह दीपावली एक नई उम्मीद लेकर आई है, जिससे करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव आया है।
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नई दिल्ली में दीपावली का विशेष उत्सव


नई दिल्ली। बस्तर, जो पहले नक्सली हिंसा और सुरक्षा बलों पर हमलों के लिए जाना जाता था, इस बार दीपावली का त्योहार एक नई उम्मीद लेकर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के करनपुर सीआरपीएफ कैंप में जवानों के साथ दीपावली मनाई। इस अवसर पर उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि देश ने दशकों से चली आ रही नक्सली हिंसा के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। उन्होंने इसे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया, जिससे करोड़ों लोगों के जीवन से वामपंथी उग्रवाद का डर समाप्त हुआ है।


नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण परिवर्तन

प्रधानमंत्री ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार की दीपावली खास है, क्योंकि देश ने लंबे समय से चली आ रही नक्सलवाद और माओवादी आतंक की चुनौती से बाहर निकलने में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि अब देश का कोई भी जिला नक्सलवाद से प्रभावित नहीं है, जो न केवल सुरक्षा की उपलब्धि है, बल्कि उन करोड़ों नागरिकों के लिए भी राहत की बात है, जो वर्षों तक हिंसा और डर के साए में जीते रहे।


नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में कमी

प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि पहले देश के लगभग 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले इस समस्या से ग्रसित थे। बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में नक्सली गतिविधियों ने विकास को बाधित किया था।


उन्होंने बताया कि 2004 से 2013 के बीच स्थिति इतनी गंभीर थी कि हर साल सुरक्षा बलों के मुकाबले नक्सलियों के अधिक जवान शहीद होते थे। उस समय की सरकारों ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और इसे एक ऐसी बीमारी मान लिया था, जिसका इलाज संभव नहीं है।


सीआरपीएफ की ऐतिहासिक उपलब्धि

प्रधानमंत्री ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 12 महीनों में ड्यूटी के दौरान किसी भी सीआरपीएफ जवान की जान नहीं गई। यह 47 वर्षों में पहली बार हुआ है। उन्होंने इसे सरकार की स्पष्ट रणनीति और सुरक्षा बलों की मजबूत तैयारी का परिणाम बताया। सीआरपीएफ ने भी लगातार 12 महीनों तक ऑपरेशनल मौतों का आंकड़ा शून्य रहने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।


सुरक्षा बलों के बलिदान को किया गया सम्मान

मोदी ने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के जवानों ने अनगिनत कुर्बानियां दी हैं। उन्होंने सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, आईआरबी, राज्य पुलिस बलों, बस्तर फाइटर्स और विशेष बलों के योगदान की सराहना की। महिला कमांडो के साहस और सेवाभाव का भी विशेष रूप से उल्लेख किया।


प्रधानमंत्री ने कहा कि इन जवानों की निष्ठा और समर्पण के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हालात बदलने लगे हैं। सरकार ने सेवा और विकास की भावना के साथ इन इलाकों में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास किए हैं। अब नक्सली हिंसा से प्रभावित लोग भी सरकार और सुरक्षा बलों के प्रयासों का समर्थन करने के लिए आगे आ रहे हैं।


राष्ट्र प्रथम की भावना से विकास को मिली गति

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देश राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ता है, तो शांति और सुरक्षा का वातावरण बनता है और विकास के नए रास्ते खुलते हैं। उन्होंने पिछले 12 वर्षों में नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ मिली सफलता के साथ गरीबी उन्मूलन के प्रयासों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, लगभग 50 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है।


मोदी ने कहा कि सुरक्षा और विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जहां हिंसा समाप्त होती है, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ती हैं। बस्तर में जवानों के साथ दीपावली मनाकर प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के त्याग को सम्मान देने के साथ क्षेत्र में बदलते हालात का संदेश भी दिया।