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बाबा नीम करौली महाराज की संपत्ति विवाद में जांच शुरू

बाबा नीम करौली महाराज की पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद अब जांच के चरण में पहुँच गया है। उनकी छह पौत्रियों ने संपत्ति पर वारिसाना अधिकार का दावा किया है। प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और पौत्रियों का पक्ष क्या है।
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संपत्ति विवाद की पृष्ठभूमि

महान संत बाबा नीम करौली महाराज की अकबरपुर में स्थित पैतृक संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद अब जांच के चरण में पहुँच गया है। बाबा की छह पौत्रियों ने प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखते हुए पैतृक मकान, डाक बंगले और मंदिर सहित संपत्ति पर वारिसाना अधिकार का दावा किया है। परिवार का कहना है कि यह संपत्ति उनके पूर्वजों की है और इसे किसी ट्रस्ट को न तो बेचा गया है और न ही दान किया गया है।


शिकायत और प्रशासनिक कार्रवाई

यह मामला 24 अगस्त को शुरू हुआ, जब बाबा की पौत्री भावना रावत के पति मनोज रावत ने जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने ठाकुर जी हनुमान ट्रस्ट पर बाबा की पैतृक संपत्ति पर कथित कब्जा करने का आरोप लगाया।

जिलाधिकारी के आदेश पर जांच शुरू

शिकायत के बाद जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने मामले की जांच के लिए एडीएम न्यायिक अरविंद द्विवेदी की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। प्रशासन ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी करते हुए सात दिन के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा।


पौत्रियों का पक्ष

भावना रावत के साथ अन्य पौत्रियों ने तहसीलदार कार्यालय के माध्यम से अपना जवाब प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि संपत्ति को परिवार की ओर से किसी व्यक्ति या ट्रस्ट के नाम पर हस्तांतरित नहीं किया गया है।

सरकारी रिकॉर्ड में बाबा का नाम

परिवार ने प्रशासन को दिए गए जवाब में भूखंड संख्या 220 का उल्लेख किया है, जिसमें आज भी बाबा नीम करौरी महाराज का नाम दर्ज है। भूखंड संख्या 211 को सरकारी अभिलेखों में बाबा की जन्मस्थली बताया गया है।


प्रशासनिक पेच

इस विवाद में एक प्रशासनिक पेच सामने आया है। पौत्रियों का कहना है कि उन्होंने 7 सितंबर को तहसीलदार कार्यालय में नोटिस का जवाब समय पर सौंप दिया था, लेकिन समाधान दिवस के कारण उनके दस्तावेज पर समाधान दिवस की मुहर लग गई और इसे शिकायत के रूप में दर्ज कर लिया गया।

इस कारण उनका जवाब जांच समिति के अध्यक्ष एडीएम न्यायिक तक समय पर नहीं पहुँच सका। एडीएम का कहना है कि उन्हें नोटिस के जवाब की औपचारिक प्रति अभी प्राप्त नहीं हुई है। दूसरी ओर, पौत्रियों का दावा है कि उन्होंने समय सीमा के भीतर अपना जवाब जमा किया था।

आरआई योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि पौत्रियों का जवाब उनके स्तर पर प्राप्त हुआ है और इसे जल्द ही संबंधित उच्चाधिकारियों तक भेजा जाएगा। अब प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज इस जवाब के आधार पर आगे की जांच और संपत्ति विवाद पर कार्रवाई की उम्मीद है।