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बाराबंकी में झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से बच्चे की मौत, तीन अन्य गंभीर

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से एक डेढ़ वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, जबकि उसके तीन भाई-बहन गंभीर हालत में हैं। घटना के बाद प्रशासन ने अवैध क्लिनिक को बंद कर दिया और आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध चिकित्सा प्रथाओं पर गंभीर सवाल उठाता है। जानें पूरी घटना के बारे में।
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बाराबंकी में दर्दनाक घटना

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ कस्बे से एक बेहद दुखद घटना की सूचना मिली है। यहां एक झोलाछाप डॉक्टर द्वारा गलत इंजेक्शन लगाने के कारण एक डेढ़ वर्षीय बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा, मृतक बच्चे के तीन अन्य भाई-बहनों की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध क्लिनिक को बंद कर दिया है और आरोपी डॉक्टर को हिरासत में ले लिया है।


इलाज के दौरान बच्चों की हालत बिगड़ी

जानकारी के अनुसार, लोहिया मोहल्ले के निवासी कल्लू हाशमी की पत्नी ने 28 जून को अपने चार बच्चों को, जिनमें आठ वर्षीय तमन्ना, चार वर्षीय साजिद और डेढ़ वर्षीय जुड़वां बच्चे हसनैन और मारिया शामिल थे, इलाज के लिए एक निजी क्लिनिक में ले जाया। वहां क्लिनिक संचालक ने सभी बच्चों को एक-एक कर इंजेक्शन लगाया। जैसे ही इंजेक्शन लगाया गया, बच्चों के मुंह से झाग निकलने लगा और उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। कुछ ही मिनटों में हसनैन ने दम तोड़ दिया।


पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया

बच्चे की मौत के बाद क्लिनिक में हंगामा मच गया। स्थानीय पुलिस और उपजिलाधिकारी राजेश विश्वकर्मा घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने आरोपी डॉक्टर जगमोहन गुप्ता को मौके से भागने के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया।


अवैध क्लिनिक को सील किया गया

स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ पहुंचे अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. लव कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आरोपी के पास चिकित्सा अभ्यास से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। पुलिस ने मृतक बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।


गंभीर बच्चों का इलाज जारी

बाकी तीन बच्चों, तमन्ना, साजिद और मारिया को गंभीर स्थिति में हैदरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। वहां से उन्हें बाराबंकी जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।