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बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी जल विवाद का समाधान

बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे पर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिससे 25 वर्षों से चल रहे विवाद का समाधान हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुए इस समझौते से लाखों किसानों को सिंचाई और पेयजल की सुविधा मिलेगी। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'टीम भारत' की सोच का एक उदाहरण है। जानें इस समझौते के प्रमुख बिंदुओं और इससे प्रभावित क्षेत्रों के बारे में।
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सोन नदी जल बंटवारे पर ऐतिहासिक समझौता


सोमवार को बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे पर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ, जिससे 25 वर्षों से चल रहे विवाद का समाधान हुआ है। यह समझौता ग्रामीण किसानों के लिए सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।


इस समझौते पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने इसे पूर्वी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण जल विवाद समाधान बताया, जिससे लाखों किसानों को लाभ होगा।


गृह मंत्री ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'टीम भारत' की सोच और सहकारी संघवाद का एक बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने बताया कि संवाद और सहयोग के माध्यम से यह संभव हुआ।


समझौते के अनुसार, बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जैसे क्षेत्रों को पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिलेगा। वहीं, झारखंड के पलामू और गढ़वा जैसे क्षेत्रों में भी जल उपलब्ध होगा।


इस वर्ष अब तक चार जल समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो सिंचाई और ग्रामीण विकास में मदद करेंगे। गृह मंत्री ने बताया कि अंतरराज्यीय परिषद के माध्यम से जल विवादों का समाधान किया जा रहा है।


इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।