Newzfatafatlogo

बिहार में उच्च शिक्षा के लिए नया विधेयक: विरोध और विवाद

बिहार में उच्च शिक्षा के लिए लाए गए नए विधेयक का विरोध तेज हो गया है। राज्य सरकार का प्रस्ताव है कि डिग्री कॉलेजों को उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत लाया जाए, जिससे पीजी और अनुसंधान संस्थान अलग होंगे। इस विधेयक के खिलाफ जनता दल यू और भाजपा के विधायकों ने चिंता जताई है कि इससे कॉलेजों की स्वायत्तता और गुणवत्ता प्रभावित होगी। जानें इस विवाद के पीछे की वजहें और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ।
 | 

बिहार में उच्च शिक्षा में बदलाव का प्रस्ताव


केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा में सुधार के लिए 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' पेश किया है, जिस पर संसदीय समिति विचार कर रही है। हालांकि, इस समिति की रिपोर्ट अभी तक प्रस्तुत नहीं की गई है। इसी बीच, बिहार में उच्च शिक्षा से संबंधित एक नए विधेयक का विरोध शुरू हो गया है। राज्य सरकार का प्रस्ताव है कि उच्च शिक्षा को दो भागों में विभाजित किया जाए। इसके लिए एक विधेयक तैयार किया गया है, जिसमें डिग्री कॉलेजों को सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत लाने का सुझाव दिया गया है। इससे पीजी और अनुसंधान संस्थानों को अलग रखा जाएगा, जिनमें राज्यपाल की भूमिका होगी। अन्य डिग्री कॉलेज इस दायरे से बाहर रहेंगे।


यह ध्यान देने योग्य है कि जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे, तब इस मुद्दे पर राजभवन के साथ टकराव हुआ था। विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों को लेकर कई विवाद उठे थे। उस समय विधेयक लाकर विश्वविद्यालयों को राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र से बाहर करने की चर्चा हुई थी। वर्तमान में विवाद नहीं होने के बावजूद, सरकार इस विधेयक को लाने की प्रक्रिया में है। जनता दल यू और भाजपा के कई विधायकों ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे डिग्री कॉलेजों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और उनकी गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, यह भी कहा जा रहा है कि डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी, जिससे इस विधेयक का विरोध और बढ़ गया है।