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बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर, 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित

बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है, जहां 11 जिलों में लगभग 10.26 लाख लोग प्रभावित हैं। गंगा नदी का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर गया है, जिससे राजधानी पटना के निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राहत कार्यों की निगरानी के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई और राहत सामग्री का वितरण शुरू कर दिया है। जानें इस संकट के बारे में और अधिक जानकारी।
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बिहार में बाढ़ का संकट


बिहार में बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। राज्य के 11 जिलों में लगभग 10.26 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। शनिवार सुबह पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर 10 सेंटीमीटर बढ़कर उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर गया, जैसा कि आधिकारिक बुलेटिन में बताया गया है।


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी मंत्रियों और अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और राहत कार्यों की निगरानी करने का निर्देश दिया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में रहकर राहत कार्यों की देखरेख करने के लिए कहा गया है, क्योंकि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।


जल संसाधन विभाग के अनुसार, शनिवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर से एक सेंटीमीटर ऊपर था, जिससे राजधानी के निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। लोगों को नदी के बढ़ते जलस्तर के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।


बुलेटिन में बताया गया है कि बिहार के कई स्थानों पर नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। इनमें डुमरियाघाट, हाजीपुर में गंडक, बलतारा में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में गंगा शामिल हैं।


राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण 11 जिलों के 50 प्रखंडों और 201 ग्राम पंचायतों में लगभग 10.26 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।


प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया शामिल हैं।


जल संसाधन विभाग ने बताया कि पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर शनिवार सुबह 10 बजे 50.53 मीटर दर्ज किया गया, जो पिछले चार घंटे में 10 सेंटीमीटर की वृद्धि है और यह उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर से एक सेंटीमीटर अधिक है।


विभाग ने अनुमान लगाया है कि गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर रविवार सुबह आठ बजे तक 50.62 मीटर तक पहुंच सकता है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


पटना के पंडारक में भी गंगा का जलस्तर शनिवार सुबह 10 बजे 43.78 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर 43.73 मीटर था।


विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को एहतियाती कदम उठाने और बाढ़ जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष दलों की गश्त सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।


राज्य और पड़ोसी नेपाल में हुई भारी बारिश के कारण विभिन्न नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। बिहार में सितंबर में अब तक 60.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 69 प्रतिशत अधिक है।


राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न जिलों में 38 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं।


अब तक बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच 12,300 पॉलीथीन शीट और 2,250 सूखा राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। लोगों की निकासी और आवागमन के लिए 858 नावें संचालित की जा रही हैं।


इसके अलावा, बाढ़ प्रभावित जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की 27 टीम और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के सात दल तैनात किए गए हैं।


मुख्यमंत्री ने पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने और आवश्यक एहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया है।


पटना में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा, 'मुख्यमंत्री स्थिति पर नजर रख रहे हैं। सरकार पूरी तरह से हालात से अवगत है। सभी यह प्रयास कर रहे हैं कि इस आपदा के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।'


उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। नेपाल में आई आपदा और लगातार बारिश के बाद से ये हालात हैं।'