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बिहार सरकार का बड़ा फैसला: प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं होगी कार्रवाई

बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि 26 जुलाई को शाम 6:00 बजे से पहले राज्य में किसी भी विरोध-प्रदर्शन में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, सभी FIR और आपराधिक शिकायतें वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह कदम उस समय उठाया गया है जब नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों को हिरासत में लिया गया था। जानें इस फैसले के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभाव।
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बिहार सरकार का ऐलान

बिहार सरकार ने सोमवार को यह घोषणा की कि 26 जुलाई को शाम 6:00 बजे से पहले राज्य में किसी भी विरोध-प्रदर्शन में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।


सभी FIR और शिकायतें वापस होंगी

सरकार ने यह भी बताया कि वह विरोध प्रदर्शनों से संबंधित सभी FIR, आपराधिक शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लेगी। इसके साथ ही, जिन लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है, उन्हें रिहा किया जाएगा और भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।


बिहार पुलिस की कार्रवाई

सोमवार की शाम को बिहार पुलिस ने बताया कि नीट पेपर लीक के मामले में 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें से लगभग आधे छात्र नाबालिग हैं। पुलिस ने कहा कि 25 जुलाई को वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा आयोजित बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा में 91 पुलिसकर्मी और 13 आम नागरिक घायल हुए।


CJP की चेतावनी

देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के संदर्भ में, कॉकरोच जनता पार्टी ने मोदी सरकार को चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई जारी रही, तो वे फिर से आंदोलन करेंगे। CJP और केंद्र सरकार के बीच हुए समझौते में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी मामला या कार्रवाई नहीं की जाएगी।


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