बृजभूषण शरण सिंह ने राहुल गांधी को दी नसीहत, संसद में उठाने को कहा मुद्दे
बृजभूषण का राहुल गांधी पर हमला
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला किया है। राहुल गांधी ने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया था कि वे विदेश सहायता के माध्यम से शासन चला रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, बृजभूषण ने सलाह दी कि राहुल को इस विषय पर बोलने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को भारतीय लोकतंत्र और संसद पर भरोसा करना चाहिए, बजाय इसके कि वे विदेशी उदाहरणों का सहारा लें।
राहुल गांधी की विदेशों पर निर्भरता
बृजभूषण ने कहा कि राहुल गांधी को अमेरिका, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान के दृष्टिकोण से भारत को देखने की आदत छोड़नी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल और उनके सहयोगी लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते, इसलिए वे भारत के मुद्दों पर चर्चा करते समय विदेशी संदर्भों का उपयोग करते हैं। उनके अनुसार, देश के मुद्दों को केवल देश के भीतर उठाया जाना चाहिए और इनकी चर्चा भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं के मंच पर होनी चाहिए।
संसद में चर्चा का महत्व
बृजभूषण ने आगे कहा कि यदि राहुल गांधी को किसी मुद्दे पर अपनी बात रखनी है या सरकार से सवाल पूछना है, तो संसद सबसे उपयुक्त स्थान है। उन्होंने कहा, 'आप इन मुद्दों को संसद में क्यों नहीं उठाते? संसद का गठन इसलिए किया गया है ताकि आप वहां अपनी बात कह सकें।' उन्होंने फिर से राहुल को सलाह दी कि उन्हें इन मुद्दों पर बोलने से बचना चाहिए।
राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी देश से झूठ बोलते हैं और उनकी सत्ता धांधली के कारण है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीएम मोदी की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह से विदेशी नियंत्रण में है। राहुल ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'मोदी जी, इस देश से झूठ बोलना बंद कीजिए। आप विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने हैं। आपकी आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह विदेशियों के नियंत्रण में है। मैं आपको इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देता हूं।'
बीजेपी का पलटवार
राहुल गांधी के इस बयान के बाद, बीजेपी के कई नेताओं ने उन पर निशाना साधा है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि राहुल गांधी अराजकता फैलाने वाली ताकतों का नेतृत्व कर रहे हैं। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी और उनके परिवार की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाए, यह पूछते हुए कि जब राहुल लोकतंत्र की बात करते हैं, तो उन्हें विदेशी मदद का सहारा क्यों लेना पड़ता है।
