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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: मोदी ने वैश्विक साउथ की भूमिका पर जोर दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में वैश्विक साउथ की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को नियम बनाने वाले के रूप में उभरना होगा और यूएनएससी में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया। इस सम्मेलन में कई वैश्विक नेता शामिल हुए, और मोदी ने ब्रिक्स के सुधारों के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया। जानें इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अन्य मुख्य बातें।
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ब्रिक्स की पहचान और वैश्विक भूमिका

नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की औपचारिक शुरुआत करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी एक महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। उन्होंने इस सम्मेलन को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह गुट किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं है।


ग्लोबल साउथ की नई भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के उद्घाटन में कहा कि 'ग्लोबल साउथ' को नियमों का पालन करने वाले के बजाय नियम बनाने वाले के रूप में उभरना होगा। इस सम्मेलन में यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा होने की संभावना है।


ब्रिक्स की पहचान का महत्व

ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर पहचान स्थापित की


मोदी ने अपने प्रारंभिक संबोधन में कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान बनाई है और यह किसी के खिलाफ नहीं है। उनके इस बयान को अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।


ग्लोबल साउथ की आवाज़

ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में पहली पंक्ति में खड़ा


मोदी ने कहा, 'आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सामना कर रहा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह पीछे रह जाता है। हमें इस 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को 'साझेदारी के मंच' में बदलना होगा, जहां हर देश की आवाज़ हो और मानवता के विकास का केंद्र हो।'


वैश्विक शासन सुधार का प्रस्ताव

मोदी ने कहा, 'इस संदर्भ में, मेरा सुझाव है कि हम मिलकर वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करें, जिसका उद्देश्य अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें एक ब्रिक्स सुधार रोडमैप में बदलना होगा।'


सम्मेलन में शामिल वैश्विक नेता

ये ग्लोबल नेता मौजूद


मोदी ने ये टिप्पणियां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की उपस्थिति में कीं।


अन्य नेताओं में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी और वियतनामी प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग शामिल हैं।


यूएनएससी में सुधार की आवश्यकता

यूएनएससी में तत्काल सुधार का आह्वान किया


प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, 'वैश्विक शासन की वर्तमान संरचना एक पिरामिड की तरह है, जहां निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तरों में वे देश शामिल हैं जो इन निर्णयों से प्रभावित होते हैं।'


मोदी ने कहा कि विभिन्न वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए ग्लोबल साउथ को नियम बनाने वाला बनना होगा। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नाविक नेटवर्क का प्रस्ताव भी रखा।