ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: वैश्विक तनाव के बीच भारत की भूमिका महत्वपूर्ण
ब्रिक्स सम्मेलन का महत्व
नई दिल्ली: वैश्विक संघर्षों और तनावों के बीच भारत में आयोजित हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ गई है। रक्षा विशेषज्ञ कमोडोर (रिटायर्ड) रंजीत राय ने बताया कि जब रूस-यूक्रेन युद्ध अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल के बीच तनाव बढ़ रहा है, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हो रहा यह सम्मेलन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वैश्विक स्थिति और ब्रिक्स की भूमिका
रंजीत राय ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ब्रिक्स सम्मेलन की अहमियत काफी बढ़ गई है। एक ओर रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है, वहीं अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए हैं। इजरायल गाजा में हमास के खिलाफ और लेबनान में कार्रवाई कर रहा है, जबकि हूती सऊदी अरब पर हमले की योजना बना रहे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में यह सम्मेलन अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी जैसे निर्विवाद नेता कर रहे हैं, जिनके विश्व के प्रमुख नेताओं के साथ अच्छे संबंध हैं। उन्होंने शी जिनपिंग को आमंत्रित किया है, जो अगले दिन सम्मेलन में शामिल होंगे, जबकि राष्ट्रपति पुतिन पहले ही आ चुके हैं और द्विपक्षीय वार्ता कर चुके हैं।
आर्थिक मुद्दे और ब्रिक्स का व्यापार सम्मेलन
ब्रिक्स से संबंधित व्यापार सम्मेलन भी चल रहा है, और अंततः सभी मुद्दे अर्थव्यवस्था पर ही केंद्रित होते हैं। 11 देशों का यह समूह अब दुनिया की लगभग आधी जनसंख्या और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि ब्रिक्स देश संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में अपनी भूमिका और हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। जब ग्लोबल साउथ भारत मंडपम में एकत्रित है, तो पश्चिम और यूरोप की नजरें भी इसी पर टिकी हैं। यह सम्मेलन बहुत अच्छी तरह से आयोजित किया गया है, और उम्मीद है कि इस बार सम्मेलन के अंत में एक ठोस और सुनने लायक संयुक्त बयान सामने आएगा।
मोदी-पुतिन संबंध और वैश्विक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात अमेरिका और पश्चिमी देशों को क्या संदेश देती है, इस पर रक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि मोदी दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि भारत किसी के खिलाफ नहीं है। प्रधानमंत्री हमेशा 'वसुधैव कुटुंबकम' की बात करते हैं, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। यदि सभी देश मिलकर सहयोग करें, तो सभी को लाभ होगा।
ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात
विशेषज्ञ ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी मुलाकात की। अमेरिका एक महाशक्ति है और इजरायल के साथ खड़ा है, जो खुद एक बड़ी सैन्य शक्ति है। इजरायल गाजा में हमलों को अपनी सुरक्षा के नाम पर सही ठहराता है, जबकि वह फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य के रूप में स्वीकार नहीं करता। ये सभी महत्वपूर्ण मुद्दे राष्ट्रपति पुतिन के साथ हुई बातचीत में उठाए गए होंगे। हालांकि, हर बात सार्वजनिक नहीं की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी अच्छी तरह जानते हैं कि भारत इन वैश्विक संकटों में क्या और कितना योगदान दे सकता है।
