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भाजपा की दो तिहाई बहुमत की खोज: महिला आरक्षण कानून पर संशोधन

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत की तलाश कर रही है। हाल के प्रदर्शनों और राजनीतिक माहौल के चलते भाजपा को नई पार्टियों का समर्थन जुटाने में कठिनाई हो रही है। डीएमके से भाजपा को उम्मीद है कि वह अपने सांसदों का समर्थन प्राप्त कर सकेगी। विपक्षी गठबंधन में भी कमी आई है, जिससे भाजपा की स्थिति मजबूत हो सकती है। जानें इस राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा की रणनीतियाँ और संभावनाएँ।
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महिला आरक्षण कानून में संशोधन की कोशिश


भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला आरक्षण कानून, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है, में संशोधन और परिसीमन बिल को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की तलाश कर रही है। इस साल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण बिल पास नहीं हो पाए थे, जिसके बाद से भाजपा की यह कोशिश जारी है। मानसून सत्र का अभी तक समापन नहीं किया गया है, और इसके पीछे यही कारण बताया जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या भाजपा अगले कुछ दिनों में दो तिहाई बहुमत जुटा पाएगी ताकि संविधान संशोधन का विधेयक पास हो सके।


भाजपा के लिए नई पार्टियों का समर्थन प्राप्त करना कठिन हो रहा है, खासकर चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों और देश के मौजूदा माहौल के कारण। पहले जो कार्य सरल लग रहा था, उसमें अब नई जटिलताएँ उत्पन्न हो गई हैं। एक ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का गठबंधन है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी का समर्थन प्राप्त करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी भी सक्रिय है। इन प्रदर्शनों के चलते सरकार के खिलाफ माहौल बन रहा है।


भाजपा को डीएमके से उम्मीद

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि इन विरोध प्रदर्शनों के बीच भी दो तिहाई बहुमत जुटाना संभव है, क्योंकि कांग्रेस से नाराज कई दल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकार का समर्थन देने के लिए तैयार हैं। भाजपा को सबसे अधिक उम्मीद डीएमके से है, जिसने हाल ही में एक प्रदर्शन में भाग नहीं लिया। बीजू जनता दल भी कांग्रेस के खिलाफ है, लेकिन उसके नेता प्रदर्शन में शामिल हुए।


डीएमके ने कांग्रेस से दूरी बना ली है, जिससे भाजपा को विश्वास है कि डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन उसे मिल सकता है। यदि ये सांसद सीधे तौर पर विधेयक का समर्थन नहीं करते हैं, तो भी सदन से अनुपस्थित रहकर सरकार की मदद कर सकते हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के 'इंडिया' ब्लॉक में शामिल होने के बाद डीएमके के पास विकल्प सीमित हो गए हैं।


विपक्षी गठबंधन में कमी

भाजपा का स्थिति इस बात से भी मजबूत होती दिख रही है कि तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी में टूट हो गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में 'इंडिया' ब्लॉक की ताकत 233 सीटों से घटकर 178 सीटों पर आ गई है। विपक्षी गठबंधन के अनुसार, 19 पार्टियों के 178 लोकसभा सांसद और 62 राज्यसभा सांसद चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसका मतलब है कि 'इंडिया' ब्लॉक की ताकत में 47 सांसदों की कमी आई है। यदि ये सांसद भाजपा के साथ जुड़ जाते हैं, तो संसद में दो तिहाई बहुमत प्राप्त करने में भाजपा को कोई समस्या नहीं होगी।