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भाजपा संगठन में राम माधव और स्मृति ईरानी की महत्वपूर्ण वापसी

भारतीय जनता पार्टी में राम माधव और स्मृति ईरानी की वापसी ने संगठन में नई हलचल पैदा कर दी है। राम माधव को उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि स्मृति ईरानी को उनके चुनावी प्रयासों के बाद फिर से महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। इस बदलाव को आरएसएस के प्रभाव के बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जानें इन नेताओं की नई जिम्मेदारियों और भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में उनके योगदान के बारे में।
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भाजपा में बदलाव की नई लहर


भारतीय जनता पार्टी में राम माधव की वापसी एक महत्वपूर्ण घटना है। पहले उनके महासचिव बनने की चर्चा थी, लेकिन अब उन्हें उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया है। राम माधव पहले भी पार्टी के महासचिव रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रवक्ता भी रहे हैं। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही, खासकर जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में। हालांकि, कुछ समय के लिए उन्हें संगठन से हटा दिया गया था। हाल ही में, उन्हें ग्रेटर बेंगलुरू नगर निगम चुनाव का प्रभारी बनाया गया था, और अब उपाध्यक्ष के रूप में उनकी नई भूमिका को आरएसएस के प्रभाव के बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।


स्मृति ईरानी की भी भाजपा में वापसी हुई है। वे पहले भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष और पार्टी की प्रमुख प्रवक्ता रह चुकी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उनके योगदान के कारण उन्हें फिर से मौका मिला है।


सौदान सिंह को भी संयुक्त संगठन महामंत्री के रूप में पुनः नियुक्त किया गया है। उन्हें पहले उपाध्यक्ष बना दिया गया था, लेकिन अब वे शिव प्रकाश के साथ मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा, पीयूष गोयल को भी संगठन में वापस लाया गया है और उन्हें कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वसुंधरा राजे, वैजयंत जय पांडा और डी पुरंदेश्वरी जैसे पुराने नेताओं को भी नितिन नबीन की टीम में रखा गया है। यह संकेत मिलता है कि पार्टी के संगठन का कामकाज अब इन अनुभवी नेताओं के हाथ में होगा।