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भारत और कनाडा के बीच व्यापार समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति

भारत और कनाडा के बीच आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सीईपीए और एफटीए पर वार्ता जारी है। हाल ही में ओटावा में तीसरे दौर की वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसमें सकारात्मक प्रगति देखने को मिली। दोनों देशों के अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की, जिससे व्यापार में वृद्धि की उम्मीद है। जानें इस महत्वपूर्ण समझौते के संभावित लाभ और भारत-यूके के बीच सीईटीए के लागू होने के बारे में।
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भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की योजना


भारत और कनाडा के बीच आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए वार्ता जारी


भारत और कनाडा, वैश्विक परिवेश में आपसी व्यापार को मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक भागीदार समझौता (सीईपीए) और मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर वार्ता इस वर्ष पूरी करने की योजना है। दोनों पक्षों को उम्मीद है कि यह वार्ता जल्द ही समाप्त होगी, जिसके बाद अगले वर्ष यह महत्वपूर्ण समझौता लागू किया जाएगा।


तीसरे दौर की वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न

भारत और कनाडा ने 6 से 10 जुलाई तक ओटावा में सीईपीए के लिए तीसरे दौर की वार्ता सफलतापूर्वक पूरी की। वाणिज्य विभाग द्वारा जारी सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, चर्चा के दौरान सभी मोर्चों पर सकारात्मक प्रगति देखी गई। यह दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वे 2026 तक वार्ता को संपन्न करने के लिए तत्पर हैं। सीईपीए, पारंपरिक वस्तुओं के मुक्त व्यापार समझौते से आगे बढ़कर सेवाओं, निवेश, सरकारी खरीद, डिजिटल व्यापार और सतत विकास को भी कवर करेगा।


समझौते से लाभ के क्षेत्र

दोनों देशों के अधिकारियों ने वस्तुओं के लिए बाजार पहुंच, मूल स्थान नियम, सेवा क्षेत्र में व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ तकनीक, कृषि और दवाओं सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। कनाडा, भारत के लिए पोटाश, दालों और ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत है, जबकि भारत कनाडा को दवाएं, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और आईटी सेवाओं का निर्यात करता है। हालांकि तीसरे दौर में बनी सहमति के विवरण का खुलासा नहीं किया गया, लेकिन यह संकेत देता है कि इस साल के अंत में मंत्री-स्तरीय जुड़ाव से पहले तकनीकी बारीकियों को सुलझाने में तेजी आएगी।


भारत और ब्रिटेन के बीच सीईटीए लागू

आज से भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) लागू हो गया है। यह समझौता केवल टैरिफ घटाने वाला नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों का एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, यह भारत के व्यापारिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम होंगी, जिससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।