भारत और जापान की ऊर्जा सुरक्षा सहयोग में नई पहल
भारत-जापान की ऊर्जा सुरक्षा साझेदारी
नई दिल्ली : विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में जानकारी दी कि भारत और जापान ने मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्यों के बीच ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। दोनों देशों ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित, स्थिर और किफायती बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग करने पर सहमति जताई है, जिसमें रणनीतिक तेल भंडारण, वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री परिवहन और संस्थागत सहयोग शामिल हैं।
यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में सामने आया। दोनों नेताओं ने एशिया के दो प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता देशों के रूप में वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय (एमईटीआई) ने रणनीतिक तेल भंडारण प्रणाली को सुदृढ़ करने पर सहमति बनाई है।
इस सहयोग के तहत, दोनों देश कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के राष्ट्रीय भंडारण तंत्र, उद्योगों के भंडारण मॉडल, तेल उत्पादक देशों के साथ समन्वय, आपातकालीन स्थितियों में ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने और बाजार को स्थिर रखने जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत और जापान वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल और गैस आयात करने वाले देशों की सामूहिक आवाज को मजबूत करने के लिए भी सहयोग करेंगे।
दोनों देश ऊर्जा बाजार के रुझानों से संबंधित जानकारी साझा करेंगे, कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को कम करने के उपायों पर काम करेंगे और तीसरे देशों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के नए विकल्प तलाशेंगे। इसके साथ ही, अन्य देशों के अपस्ट्रीम ऑयल और गैस क्षेत्र में संयुक्त निवेश की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
भारत और जापान ने यह भी माना कि तेल और गैस के सुरक्षित, मजबूत और आत्मनिर्भर समुद्री परिवहन प्रणाली दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। इसी उद्देश्य से, दोनों देश समुद्री ऊर्जा परिवहन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने, संयुक्त निवेश करने और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने की संभावनाओं पर काम करेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने के लिए दोनों देशों की प्रमुख संस्थाओं के बीच साझेदारी बढ़ाई जाएगी।
भारत की ओर से इंडियन नेशनल ऑयल कंपनियां, इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) और अन्य संबंधित संस्थाएं इस सहयोग का हिस्सा होंगी। वहीं, जापान की ओर से जापान ऑर्गेनाइजेशन फॉर मेटल्स एंड एनर्जी सिक्योरिटी (जेओजीएमईसी), जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) और अन्य संबंधित संस्थाएं इस साझेदारी में शामिल रहेंगी।
दोनों देशों ने तय किया है कि इस संयुक्त पहल को आगे बढ़ाने के लिए भारत-जापान ऊर्जा संवाद (इंडिया-जापान एनर्जी डायलॉग) के तहत गठित पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस संयुक्त कार्य समूह (ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप) के माध्यम से नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी।
इस मंच के जरिए दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी नवीनतम जानकारी साझा करेंगे, साझा हितों वाले क्षेत्रों की पहचान करेंगे और भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर मिलकर काम करेंगे।
संयुक्त बयान में भारत ने दक्षिण एशिया में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के अपने प्रयासों और जापान ने पीओडब्ल्यूईआरआर एशिया (व्यापक ऊर्जा और संसाधन लचीलेपन पर साझेदारी) जैसी क्षेत्रीय पहलों का उल्लेख किया। दोनों देशों ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से पूरे एशिया क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में सहयोग जारी रहेगा।
भारत और जापान का यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा दुनिया की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है। दोनों देशों का मानना है कि यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि एशिया में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
